नेपाल
02 Jun, 2026

सीमा विवाद पर पीएम बयान से आरएसपी में मतभेद, विपक्ष की माफी की मांग

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के विवादित बयान को लेकर आरएसपी में मतभेद उभर आए हैं और विपक्षी दलों ने माफी की मांग की है।

काठमांडू, 02 जून।

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के विवादित बयान को लेकर सत्तारूढ़ राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी (आरएसपी) में मतभेद उभरकर सामने आए हैं। प्रधानमंत्री ने कहा था कि नेपाल ने भी भारतीय क्षेत्र में अतिक्रमण किया है, जिसे लेकर पार्टी के एक वर्ग ने इसे वापस लेने और संसद में राष्ट्र से माफी मांगने की मांग की है।

आरएसपी के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि प्रधानमंत्री को अपना बयान वापस लेना चाहिए और संसद के माध्यम से देश से क्षमा मांगनी चाहिए। वहीं उनके निकट नेताओं का एक समूह इस कदम के पक्ष में नहीं है। रविवार को प्रतिनिधि सभा में प्रधानमंत्री के बयान के बाद विपक्षी दलों की तीखी प्रतिक्रिया सामने आई और भारत-नेपाल सीमा विवाद पर नई बहस शुरू हो गई।

सूत्रों के अनुसार, आरएसपी अध्यक्ष रवि लामिछाने ने पार्टी नेताओं को निर्देश दिया है कि आधिकारिक नीति तय होने तक सार्वजनिक टिप्पणी न करें। इसके बावजूद कुछ सांसदों ने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री के बयान पर असहमति व्यक्त की है।

आरएसपी सांसद एवं अधिवक्ता यज्ञमणि न्यौपाने ने कहा कि सीमा संबंधी मामलों पर चर्चा करते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि प्रधानमंत्री का बयान संभवतः पर्याप्त तैयारी के बिना दिया गया था और पूरे वक्तव्य के संदर्भ को समझना आवश्यक है।

विपक्षी दलों—नेपाली कांग्रेस, नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एमाले) और राष्ट्रीय प्रजातन्त्र पार्टी—ने संयुक्त रूप से प्रधानमंत्री से माफी मांगने और उनके बयान को संसदीय अभिलेख से हटाने की मांग की है। कई आरएसपी सांसद निजी तौर पर बयान में सुधार की आवश्यकता मानते हैं, लेकिन अनुशासनात्मक कार्रवाई की आशंका के कारण सार्वजनिक रूप से नहीं बोल रहे।

सोमवार सुबह रवि लामिछाने के भारत रवाना होने से पहले पार्टी सचिवालय की वर्चुअल बैठक में भी इस मुद्दे पर चर्चा हुई। कई सदस्यों ने कहा कि सीमा विवाद का समाधान कूटनीतिक माध्यम से होना चाहिए और नदी के बहाव या तकनीकी सीमा संबंधी बदलाव को "क्षेत्रीय अतिक्रमण" नहीं कहा जाना चाहिए।

पार्टी प्रवक्ता मनीष झा ने चिंता जताई कि मीडिया सवालों का जवाब किस प्रकार दिया जाए। रवि लामिछाने ने कहा कि सीमा मुद्दे राष्ट्रीय हित के विषय हैं, दलगत राजनीति का नहीं, और पार्टी को विदेश मंत्रालय की आधिकारिक नीति के अनुरूप ही अपनी स्थिति प्रस्तुत करनी चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री से चर्चा कर स्पष्टीकरण या आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने की संभावना जताई।

संसदीय विवाद के बाद रवि लामिछाने और प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के बीच टेलीफोन पर बातचीत हुई। इस दौरान लामिछाने ने प्रधानमंत्री को बताया कि उनके बयान से राजनीतिक और कूटनीतिक जटिलताएं उत्पन्न हुई हैं और इसे गंभीरता से संबोधित किया जाना चाहिए। विपक्ष और सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर बढ़ते दबाव के बीच यह विवाद नेपाल की राजनीति का प्रमुख मुद्दा बना हुआ है।

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