नई दिल्ली, 2 जून ।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि विवाहित बेटियों को अनुकंपा नियुक्ति से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि ‘परिवार’ की परिभाषा से विवाहित बेटी को बाहर रखना पूरी तरह मनमाना, अनुचित और संविधान के खिलाफ है।
अनुकंपा नियुक्ति की व्यवस्था के तहत किसी सरकारी कर्मचारी की सेवा के दौरान मृत्यु या चिकित्सकीय कारणों से समय से पहले सेवानिवृत्ति होने पर उसके आश्रित परिवार के सदस्य को रोजगार दिया जाता है, ताकि परिवार को तत्काल आर्थिक सहारा मिल सके।
न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने यह टिप्पणी इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उस आदेश को रद्द करते हुए की, जिसमें विवाहित बेटी को परिवार की परिभाषा में शामिल नहीं माना गया था।
मामला एक महिला की याचिका से जुड़ा था, जो एक दिवंगत उचित मूल्य दुकान संचालक की विवाहित बेटी है। उसने उच्च न्यायालय के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें अनुकंपा आधार पर उसकी नियुक्ति की मांग खारिज कर दी गई थी।
महिला ने 2019 के उस सरकारी आदेश को भी चुनौती दी थी, जिसमें विवाहित बेटियों को परिवार की परिभाषा से बाहर रखा गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि आश्रित कोटा का उद्देश्य मृतक कर्मचारी के परिवार को त्वरित आर्थिक सहायता देना है, इसलिए विवाहित बेटी को इससे बाहर रखना इस उद्देश्य के विपरीत है और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।










