विज्ञान व प्रौद्योगिकी
28 May, 2026

ग्लेशियर पिघले तो बढ़ेगा जल संकट, सदानीरा समागम में इसरो वैज्ञानिक की चेतावनी

सदानीरा समागम में इसरो वैज्ञानिक डॉ. प्रकाश चौहान ने चेतावनी दी कि ग्लेशियरों के लगातार पिघलने से आने वाले वर्षों में दुनिया गंभीर जल संकट का सामना कर सकती है।

भोपाल, 28 मई ।

इसरो के वैज्ञानिक डॉ. प्रकाश चौहान ने ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि यदि अगले 50 वर्षों तक यही स्थिति बनी रही तो दुनिया बड़े जल संकट की ओर बढ़ सकती है। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि वेदों और पुराणों में नदियों को जीवन का आधार माना गया है और भारतीय संस्कृति में सदियों से उनकी पूजा की परंपरा रही है।

गुरुवार को भारत भवन में मप्र शासन के संस्कृति विभाग अंतर्गत वीर भारत न्यास द्वारा आयोजित सदानीरा समागम 2026 के दूसरे दिन पंचमहाभूतों में अग्नि तत्व और आकाश तत्व पर केंद्रित विमर्श के दौरान डॉ. चौहान ने कहा कि विज्ञान और तकनीक को केवल दस्तावेजों तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि उसे व्यवहारिक स्तर पर लागू करना जरूरी है। उन्होंने सरस्वती नदी और उससे जुड़ी प्राचीन सभ्यता का उल्लेख करते हुए ऊर्जा संरक्षण के लिए फ्लोटिंग सोलर जैसे विकल्पों को उपयोगी बताया। कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत सदानीरा समागम स्मृति चिह्न भेंट कर किया गया।

टाटा ट्रस्ट के सलाहकार एचएन श्रीनिवास ने अग्नि तत्व को ऊर्जा, बुद्धिमत्ता और आत्मशुद्धि का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह केवल अग्नि नहीं, बल्कि जीवन की चेतना का आधार है। उन्होंने उद्योगों और संस्थानों से ग्रीन एनर्जी, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और रूफटॉप सोलर को बढ़ावा देने की अपील की। साथ ही पर्यावरण और समाज के संतुलन को विकास का मूल आधार बताया।

काशी विद्वत परिषद के प्रो. रामनारायण द्विवेदी ने कहा कि भारतीय संस्कारों में अग्नि तत्व का विशेष महत्व है। जन्म से लेकर अंतिम संस्कार तक हर प्रक्रिया में इसकी उपस्थिति महत्वपूर्ण मानी जाती है। उन्होंने अग्नि को शुद्धता, ऊर्जा और संस्कारों का प्रतीक बताते हुए पारंपरिक जीवनशैली और आध्यात्मिक महत्व को रेखांकित किया।

ओएनजीसी के सीएसआर प्रमुख पीयूष प्रेरतरिया ने प्राकृतिक संसाधनों के लगातार दोहन को मानवता के लिए चुनौती बताते हुए जल संरक्षण और रिसाइक्लिंग की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि तेजी से बढ़ते जल संकट के बीच समाज को पानी और संसाधनों के सीमित उपयोग की दिशा में जागरूक होना होगा।

वैदिक विज्ञान केंद्र, बीएचयू के विनयकुमार पांडेय ने भारतीय ज्ञान परंपरा और पंचतत्व आधारित जीवनशैली की चर्चा करते हुए कहा कि भारतीय वैज्ञानिक दृष्टिकोण में प्रकृति के प्रत्येक तत्व का महत्व बताया गया है। उन्होंने आधुनिक विज्ञान और भारतीय परंपरा के समन्वय के माध्यम से सतत विकास की दिशा में सामूहिक प्रयासों की जरूरत बताई।

टाटा संस के ग्रुप चीफ सस्टेनेबिलिटी अधिकारी चाको थॉमस ने कहा कि उद्योगों को केवल पानी उपयोग तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि प्रकृति को उतना पानी लौटाने की नीति भी अपनानी चाहिए। उन्होंने नमामि गंगे जैसे अभियानों को अन्य राज्यों तक विस्तार देने की आवश्यकता जताई और 2030 तक उपयोग किए गए पानी की भरपाई का लक्ष्य साझा किया।

हिंडाल्को के सीएसआर प्रमुख अविजीत राजू ने कहा कि सस्टेनेबिलिटी अब विकल्प नहीं, बल्कि समय की आवश्यकता बन चुकी है। वहीं वेदांता ग्रुप के सीएसआर प्रमुख अनुपम निधि ने जल संरक्षण को भविष्य के लिए जरूरी बताते हुए नीति स्तर पर प्रोत्साहन और बेहतर डेटा प्रबंधन पर जोर दिया।

कैल्डेरिस की ग्रुप सस्टेनेबिलिटी हेड उत्सवी दीपक ने व्यवसाय और पर्यावरणीय संतुलन को साथ लेकर चलने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर संस्थाओं और सामाजिक संगठनों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है।

समागम के समापन सत्र में मुख्यमंत्री के संस्कृति सलाहकार एवं वीर भारत न्यास के न्यासी सचिव श्रीराम तिवारी ने सभी वक्ताओं का आभार जताते हुए कहा कि संस्कृति को हाशिए पर नहीं रखा जा सकता, क्योंकि जितना बड़ा जीवन होता है, उतनी ही बड़ी संस्कृति होती है। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव के विज्ञान और प्रौद्योगिकी के प्रति दृष्टिकोण का भी उल्लेख किया।

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