राजनीति
28 May, 2026

भारत का लोकतंत्र दुनिया के लिए प्रेरणा, ओम बिरला ने गिनाईं ताकतें

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि भारत का लोकतंत्र संवाद, सहभागिता और संवैधानिक मूल्यों के कारण दुनिया के लिए प्रेरणा बना हुआ है।

नई दिल्ली, 28 मई ।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि भारत का लोकतंत्र पूरी दुनिया के लिए मार्गदर्शक की भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि संवाद, सहभागिता और संवैधानिक मूल्यों की समृद्ध परंपराओं के माध्यम से भारत वैश्विक स्तर पर अन्य देशों को प्रेरित कर रहा है।

गुरुवार को दिल्ली विधानसभा के ऐतिहासिक कक्ष में केंद्रीय विधानसभा (1924-1930) की कार्यवाहियों के 89 खंडों और त्रैमासिक पत्रिका ‘विधान-चेतना’ के प्रथम अंक के लोकार्पण कार्यक्रम में ओम बिरला ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम की अध्यक्षता दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने की, जिसमें संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू भी शामिल हुए। इस अवसर पर दिल्ली सरकार के विधायी कार्य मंत्री प्रवेश साहिब सिंह, विधानसभा उपाध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट, विधायक, दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षक और प्राध्यापक भी मौजूद रहे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की असली शक्ति जागरूक संवाद, तथ्य आधारित चर्चा और सक्रिय जनभागीदारी में निहित होती है। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों में लोकतांत्रिक चेतना को मजबूत करने के लिए भारत की संसदीय विरासत का संरक्षण और गहन अध्ययन बेहद जरूरी है।

ओम बिरला ने कहा कि दिल्ली विधानसभा का ऐतिहासिक भवन लोकतांत्रिक चेतना, संसदीय परंपराओं और स्वतंत्रता संग्राम की गौरवशाली विरासत का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस परिसर ने संसदीय लोकतंत्र के शुरुआती दौर को देखा है, जहां स्वतंत्रता सेनानियों और राष्ट्रीय नेताओं ने नागरिक अधिकारों, प्रतिनिधित्व और स्वशासन की मांगों को प्रमुखता से उठाया था।

केंद्रीय विधानसभा के पहले भारतीय अध्यक्ष विट्ठलभाई पटेल के योगदान का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने संसदीय शिष्टाचार, निष्पक्षता और अध्यक्ष पद की गरिमा को मजबूत आधार दिया। कठिन परिस्थितियों और औपनिवेशिक शासन के दबाव के बावजूद उन्होंने संस्था की स्वायत्तता और प्रतिष्ठा को बनाए रखा, जो आज भी जनप्रतिनिधियों के लिए प्रेरणास्रोत है।

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि केवल तर्क, गंभीरता और तथ्यों पर आधारित बहस ही लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा और जनता के विश्वास को मजबूत कर सकती है। भारत की लोकतांत्रिक संस्कृति हमेशा चर्चा, सहमति और विचार-विमर्श पर आधारित रही है। ऐसे में संसद और विधानसभाओं को जनता की आकांक्षाओं का सर्वोच्च मंच बने रहना चाहिए।

केंद्रीय विधानसभा की कार्यवाहियों के प्रकाशन को ऐतिहासिक कदम बताते हुए उन्होंने उम्मीद जताई कि यह संकलन भविष्य की पीढ़ियों के लिए लोकतांत्रिक मूल्यों और संसदीय मर्यादाओं का मार्गदर्शक बनेगा। ‘विधान-चेतना’ पत्रिका की सराहना करते हुए उन्होंने इसे संसदीय अध्ययन और लोकतांत्रिक जागरूकता को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण प्रयास बताया।

संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि यदि विधायी संस्थाएं कमजोर होंगी तो लोकतंत्र भी कमजोर होगा। उन्होंने संसद और विधानसभाओं की गरिमा बनाए रखने को जनप्रतिनिधियों की सामूहिक जिम्मेदारी बताया। दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने संसदीय कार्यवाहियों को किसी भी दौर की परिस्थितियों को समझने का सबसे प्रामाणिक माध्यम बताया और ऐतिहासिक अभिलेखों के संरक्षण पर जोर दिया।

विधायी कार्य मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने कहा कि जब प्रमाणिक दस्तावेज जनता के सामने आते हैं, तब इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश करना संभव नहीं होता। उन्होंने ऐतिहासिक अभिलेखों के पुनर्संरक्षण को महत्वपूर्ण कदम बताया।

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