नई दिल्ली, 29 मई।
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए बनी 60 दिनों के अस्थाई संघर्ष विराम (सीजफायर) की सहमति ने वैश्विक बाजार में नई उम्मीदें जगा दी हैं। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा इस समझौते पर अंतिम मुहर लगाना अभी भी बाकी है, जिससे निवेशकों की नजरें व्हाइट हाउस पर टिकी हुई हैं। इस अनिश्चितता के बावजूद, कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट ने बाजार के मूड को और बेहतर बना दिया है।
सीजफायर और परमाणु कार्यक्रम पर संभावित वार्ता की खबर से उत्साहित भारतीय शेयर बाजार में भी शुक्रवार को तेजी का रुख देखा गया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता पूरी तरह से अमल में आता है, तो पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष की तीव्रता कम होगी, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में स्थिरता आएगी। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी संकेत दिए हैं कि दोनों देशों के बीच बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी है और एक ठोस समझौते के हम बेहद करीब हैं।
बाजार का यह सकारात्मक रुख केवल भारतीय सूचकांकों तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया भर के निवेशकों में एक नई ऊर्जा का संचार कर रहा है। हालांकि, कूटनीतिक स्तर पर अभी भी भाषा और शर्तों को लेकर दोनों देशों के बीच बातचीत का दौर जारी है। जब तक राष्ट्रपति ट्रंप इस समझौते को आधिकारिक रूप से स्वीकार नहीं कर लेते, तब तक बाजार में सतर्कता और उत्साह दोनों का मिला-जुला असर बना रहने की संभावना है।











