नई दिल्ली, 01 जून।
फूड प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और विपणन क्षेत्र में सक्रिय एमआर मनिवेनी फूड्स के शेयरों की शेयर बाजार में शुरुआत निवेशकों की उम्मीदों के अनुरूप नहीं रही। कंपनी का शेयर 52 रुपये के निर्गम मूल्य के मुकाबले बीएसई के एसएमई मंच पर 42.55 रुपये पर सूचीबद्ध हुआ, जो आईपीओ मूल्य से 18.17 प्रतिशत कम था। कमजोर लिस्टिंग के कारण आईपीओ निवेशकों को पहले ही दिन झटका लगा।
हालांकि सूचीबद्ध होने के बाद शेयर में कुछ खरीदारी देखने को मिली। निवेशकों की लिवाली के चलते शेयर तेजी के साथ बढ़कर 44.70 रुपये के ऊपरी सर्किट स्तर तक पहुंच गया। इसके बावजूद आईपीओ मूल्य की तुलना में निवेशक प्रति शेयर 7.30 रुपये यानी 14.04 प्रतिशत के घाटे में बने रहे।
कंपनी का 27.04 करोड़ रुपये का आईपीओ 22 मई से 26 मई के बीच निवेशकों के लिए खुला था। इस सार्वजनिक निर्गम को बाजार से अपेक्षाकृत सीमित प्रतिक्रिया मिली थी और यह कुल 1.74 गुना सब्सक्राइब हुआ। योग्य संस्थागत खरीदारों के लिए आरक्षित हिस्सा पूरी तरह भर गया था। गैर-संस्थागत निवेशकों की श्रेणी में 1.88 गुना आवेदन प्राप्त हुए, जबकि खुदरा निवेशकों के हिस्से में 2.09 गुना बोली लगी थी।
इस आईपीओ के माध्यम से कंपनी ने 10 रुपये अंकित मूल्य वाले 52 लाख नए शेयर जारी किए हैं। निर्गम से प्राप्त राशि का उपयोग नए संयंत्र की स्थापना, मशीनरी खरीद, कार्यशील पूंजी की आवश्यकताओं की पूर्ति तथा सामान्य कॉरपोरेट जरूरतों के लिए किया जाएगा।
कंपनी द्वारा प्रस्तुत वित्तीय आंकड़ों के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में लाभप्रदता में लगातार सुधार दर्ज किया गया है। वित्त वर्ष 2022-23 में कंपनी का शुद्ध लाभ 1.56 करोड़ रुपये था, जो 2023-24 में बढ़कर 2.18 करोड़ रुपये हो गया। इसके बाद 2024-25 में कंपनी का शुद्ध लाभ बढ़कर 4.13 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। वित्त वर्ष 2025-26 में अप्रैल से 31 दिसंबर 2025 की अवधि के दौरान कंपनी 3.34 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित कर चुकी थी।
राजस्व के मोर्चे पर भी कंपनी ने निरंतर वृद्धि दर्ज की है। वित्त वर्ष 2022-23 में कुल आय 119.61 करोड़ रुपये रही थी। अगले वित्त वर्ष 2023-24 में यह बढ़कर 155 करोड़ रुपये हो गई, जबकि 2024-25 में कंपनी का राजस्व 203.52 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। वित्त वर्ष 2025-26 में अप्रैल से दिसंबर 2025 के दौरान कंपनी को 116.19 करोड़ रुपये की आय प्राप्त हुई थी।
इसी अवधि में कंपनी का ऋण भार भी लगातार बढ़ा है। वित्त वर्ष 2022-23 के अंत तक कंपनी पर 9.93 करोड़ रुपये का कर्ज था। यह आंकड़ा 2023-24 में बढ़कर 15 करोड़ रुपये और 2024-25 में 20.46 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। वित्त वर्ष 2025-26 में अप्रैल से दिसंबर 2025 के दौरान कंपनी का कुल कर्ज बढ़कर 22.40 करोड़ रुपये हो गया था।
कंपनी की नेटवर्थ में भी क्रमिक वृद्धि देखने को मिली। वित्त वर्ष 2022-23 में नेटवर्थ 10.18 करोड़ रुपये थी, जो 2023-24 में बढ़कर 12.36 करोड़ रुपये हो गई। वित्त वर्ष 2024-25 में यह बढ़कर 18.59 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गई। वहीं अप्रैल से दिसंबर 2025 की अवधि में कंपनी की नेटवर्थ 21.93 करोड़ रुपये दर्ज की गई।
ईबीआईटीडीए के आंकड़े भी वृद्धि का संकेत देते हैं। वित्त वर्ष 2022-23 में यह 3.72 करोड़ रुपये था, जो अगले वर्ष बढ़कर 5.05 करोड़ रुपये हो गया। वित्त वर्ष 2024-25 में ईबीआईटीडीए 7.82 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में अप्रैल से दिसंबर 2025 के दौरान यह 6.67 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।











