गुवाहाटी, 2 जून ।
असम के पारंपरिक मुगा रेशम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने के उद्देश्य से मंगलवार को ‘मिशन सेनेहजोरी’ की शुरुआत की गई। इस महत्वाकांक्षी पहल का शुभारंभ केंद्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने संयुक्त रूप से किया। इसका लक्ष्य मुगा रेशम क्षेत्र को उच्च मूल्य वाले और निर्यातोन्मुख लक्जरी वस्त्र इकोसिस्टम में बदलना है।
मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आत्मनिर्भर पूर्वोत्तर के विजन को यह मिशन साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने मुगा रेशम को भारत की सांस्कृतिक और सभ्यतागत विरासत का प्रतीक बताते हुए इसे वैश्विक लक्जरी ब्रांड के रूप में स्थापित करने पर जोर दिया।
इस मिशन के तहत रेशम उत्पादन की पूरी मूल्य श्रृंखला को मजबूत किया जाएगा, जिसमें मेजबान पौधों की खेती, रेशमकीट बीज उत्पादन, रीलिंग, बुनाई, ब्रांडिंग, निर्यात संवर्धन, डिजिटल ट्रेसबिलिटी और पर्यटन गतिविधियां शामिल हैं।
मुगा रेशम को दुनिया का एकमात्र प्राकृतिक सुनहरा रेशम माना जाता है और यह भारत का पहला जीआई टैग प्राप्त रेशम भी है। असम में इससे जुड़े लाखों रेशम पालक और बुनकर परिवार सक्रिय हैं, हालांकि अब तक इसे अपेक्षित वैश्विक आर्थिक लाभ नहीं मिल पाया है।
मिशन को राज्य के प्रमुख रेशम उत्पादक जिलों जैसे जोरहाट, शिवसागर, लखीमपुर, धेमाजी, डिब्रूगढ़, तिनसुकिया, माजुली और सुआलकुची में क्लस्टर आधारित मॉडल पर लागू किया जाएगा। इसके तहत किसान उत्पादक संगठनों को मजबूत करने और वैश्विक बाजारों तक पहुंच बढ़ाने पर फोकस रहेगा।
इस परियोजना के लिए लगभग 396 से 411 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है, जिसके माध्यम से मुगा रेशम को वैश्विक लक्जरी इकोसिस्टम में स्थापित करने, उत्पादकों की आय बढ़ाने और असम को रेशम पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।
वर्तमान में मुगा रेशम उत्पादकों की वार्षिक आय सीमित है, जिसे इस मिशन के जरिए बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा ताकि पूरा प्रीमियम लाभ सीधे बुनकरों और रेशम पालकों तक पहुंच सके।
2028 तक इस मिशन के तहत आधुनिक रीलिंग इकाइयों की स्थापना, किसान समूहों का विस्तार, पौधों का पुनर्जनन, जीआई प्रमाणीकरण बढ़ाने और डिजिटल ट्रेसबिलिटी प्रणाली विकसित करने जैसे कई लक्ष्य तय किए गए हैं। साथ ही मुगा रेशम के निर्यात को भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ाने की योजना है।
रेशम पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ‘मुगा सिल्क ट्रेल’, सिल्क टूरिज्म पार्क और वार्षिक उत्सवों का आयोजन किया जाएगा, जिससे असम को वैश्विक रेशम विरासत पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकेगा।
मुख्यमंत्री ने इस पहल को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह मिशन न केवल सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करेगा, बल्कि किसानों, बुनकरों और कारीगरों के लिए नए आर्थिक अवसर भी सृजित करेगा।











