भोपाल, 03 जून ।
राजधानी भोपाल में आयोजित हिन्दी पत्रकारिता द्वि-शताब्दी महोत्सव के अवसर पर राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि हिन्दी पत्रकारिता का प्रारंभिक काल अत्यंत चुनौतियों से भरा रहा, लेकिन उस दौर के कर्मठ पत्रकारों ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद पत्रकारिता के आदर्शों और शुचिता को बनाए रखा।
उन्होंने कहा कि हिन्दी पत्रकारिता की यह गौरवशाली परंपरा युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है और नई पीढ़ी को इससे सीख लेनी चाहिए। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने पोस्टर प्रदर्शनी “पुरखों को प्रणाम” का अवलोकन भी किया।
राज्यपाल ने कहा कि पत्रकारिता केवल एक व्यवसाय नहीं, बल्कि समाज के प्रति उत्तरदायित्व, सत्य के प्रति निष्ठा और राष्ट्र सेवा का माध्यम है। हिन्दी पत्रकारिता ने अपने आरंभ से ही जनमत निर्माण और राष्ट्रीय चेतना को जागृत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के कठिन समय में भी हिन्दी पत्रकारिता ने जनजागरण, सामाजिक सुधार और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने का कार्य किया। इसी कारण इसका योगदान केवल स्वतंत्रता संग्राम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने ज्ञान और जागरूकता का व्यापक प्रसार किया।
राज्यपाल ने यह भी कहा कि वर्तमान समय में हिन्दी पत्रकारिता को डिजिटल प्लेटफॉर्म, वीडियो, पॉडकास्ट और मोबाइल माध्यमों से जोड़कर युवाओं तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचाना आवश्यक है।
उन्होंने पत्रकारों से आह्वान किया कि वे युवा पीढ़ी को पत्रकारिता के मूल मूल्यों—विश्वसनीयता, निष्पक्षता और सत्यनिष्ठा—की प्रेरणा दें तथा उनमें सामाजिक उत्तरदायित्व और नवाचार की भावना विकसित करें।
कार्यक्रम में राज्यपाल मंगुभाई पटेल के जीवन पर आधारित पुस्तक का भी लोकार्पण किया गया, जिसे उन्होंने स्वीकार करते हुए सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर वक्ताओं ने भारत में पत्रकारिता की प्राचीन परंपरा, पौराणिक संदर्भों और आधुनिक पत्रकारिता के विकास पर भी विचार व्यक्त किए तथा पत्रकारिता की बदलती चुनौतियों पर प्रकाश डाला।











