नई दिल्ली, 03 जून ।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा है कि विकसित भारत का लक्ष्य तभी पूर्ण हो सकता है जब आदिवासी समुदाय को विकास की मुख्यधारा से प्रभावी रूप से जोड़ा जाए। उन्होंने यह बात एकीकृत जनजातीय विकास अभिकरणों और एकीकृत जनजातीय विकास परियोजनाओं के राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए कही।
उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज सांस्कृतिक रूप से अत्यंत समृद्ध है, लेकिन कई बार योजनाओं की जानकारी और उनका लाभ समय पर उन तक नहीं पहुंच पाता, इसलिए आवश्यक है कि विकास योजनाओं को बार-बार उनके घर और गांव तक ले जाया जाए।
राष्ट्रपति ने कहा कि आदिवासी परिवार आत्मसम्मान के साथ जीवन जीते हैं और उनके कल्याण के लिए यह जरूरी है कि योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने अधिकारियों से आह्वान किया कि वे जनजातीय समुदाय के विकास कार्यक्रमों को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाएं।
उन्होंने यह भी कहा कि दूरदराज के जंगलों और पहाड़ी क्षेत्रों में बसे आदिवासी गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है तथा प्रधानमंत्री जन योजना के तहत हजारों आदिवासी गांवों तक विकास कार्यक्रम पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
राष्ट्रपति ने कहा कि जनजातीय विकास अभिकरणों की भूमिका इस दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण है ताकि योजनाओं का लाभ हर जरूरतमंद तक पहुंच सके। उन्होंने गर्भवती महिलाओं, बच्चों और युवाओं के लिए पोषण, शिक्षा और आजीविका की समुचित व्यवस्था पर विशेष जोर दिया।
उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज के पारंपरिक ज्ञान, हस्तकला और कौशल को आधुनिक विकास प्रयासों से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा सकता है। इसके लिए कौशल विकास और वित्तीय सशक्तिकरण पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
राष्ट्रपति ने अधिकारियों से अपील की कि वे आदिवासी समाज की समस्याओं को सीधे सुनें और उनके समाधान के लिए प्रभावी योजनाएं तैयार करें, क्योंकि केवल योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है बल्कि उनका सही क्रियान्वयन भी आवश्यक है।
उन्होंने शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को आदिवासी क्षेत्रों तक प्रभावी रूप से पहुंचाने पर भी बल दिया ताकि इन क्षेत्रों के बच्चों और परिवारों का समग्र विकास सुनिश्चित हो सके।










