नई दिल्ली, 03 जून ।
केंद्र सरकार ने राजधानी क्षेत्र दिल्ली-एनसीआर में पुराने ट्रक और बसों को चरणबद्ध तरीके से हटाकर नए तथा स्वच्छ वाहनों को अपनाने के लिए 9,585 करोड़ रुपये की दो वर्षीय योजना को स्वीकृति प्रदान की है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य वायु प्रदूषण को कम करना और स्वच्छ परिवहन व्यवस्था को प्रोत्साहित करना है।
प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इसके तहत राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड के माध्यम से वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी, जबकि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय तथा पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय इसके क्रियान्वयन में भूमिका निभाएंगे। इसमें दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश की राज्य सरकारें भी भागीदार होंगी।
योजना के तहत केंद्र सरकार की ओर से 5,041 करोड़ रुपये का योगदान दिया जाएगा, जबकि राज्य सरकारें कर रियायतों के रूप में लगभग 1,601 करोड़ रुपये का लाभ देंगी। इसका लाभ दिल्ली-एनसीआर में पंजीकृत बीएस-चार या उससे पुराने मानक वाले ट्रक और बस मालिकों को मिलेगा, जिन्हें बीएस-छह या इलेक्ट्रिक वाहनों से बदलने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
रिपोर्टों के अनुसार परिवहन क्षेत्र वायु प्रदूषण में महत्वपूर्ण योगदान देता है, जिसमें पीएम 2.5, कार्बन मोनोऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड का बड़ा हिस्सा शामिल है, जबकि ट्रक और बसें सीमित संख्या में होते हुए भी प्रदूषण में अधिक योगदान करती हैं।
इस योजना के तहत लाखों वाहन मालिकों को लाभ मिलने की संभावना है, जबकि पुराने वाहनों को स्क्रैपिंग केंद्रों पर नष्ट करना अनिवार्य होगा। कुछ वाहनों को एनसीआर के बाहर स्थानांतरित करने की भी अनुमति दी जाएगी, जबकि नई नीति के अनुसार कुछ श्रेणियों में केवल इलेक्ट्रिक और स्वच्छ ईंधन वाले वाहनों को ही अनुमति दी जाएगी।
योजना में ब्याज सब्सिडी, ईंधन वाउचर, इलेक्ट्रिक वाहन खरीद पर लाभ तथा अन्य वित्तीय प्रोत्साहन भी शामिल किए गए हैं। इसके साथ ही राज्य सरकारों द्वारा पंजीकरण शुल्क और करों में रियायत देने का प्रावधान किया गया है, जिससे वाहन मालिकों पर आर्थिक बोझ कम होगा।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस पूरी योजना का संचालन डिजिटल पोर्टल के माध्यम से किया जाएगा, जिससे पात्रता जांच, लाभ वितरण और प्रदूषण में कमी की निगरानी पारदर्शी तरीके से हो सके। निगरानी के लिए उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है, जो पूरे क्रियान्वयन की नियमित समीक्षा करेगी।











