मुरैना, 03 जून ।
मुरैना जिले के आदिवासी बहुल पहाड़गढ़ विकासखंड में पेयजल संकट लगातार गहराता जा रहा है, जहां नल-जल योजना के प्रभावहीन साबित होने से ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
करीब आठ हजार आबादी वाले पहाड़गढ़ मुख्यालय में रहने वाले लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी पानी जुटाने में कठिनाई हो रही है, जबकि 21 वार्डों में रहने वाली बड़ी आबादी नियमित जल आपूर्ति से वंचित बनी हुई है।
ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायतें करने के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है और जिम्मेदार विभागों की ओर से कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
क्षेत्र में मौजूद दो बड़ी पानी की टंकियों और बोरवेल के बावजूद जलापूर्ति व्यवस्था पूरी तरह से सुचारु नहीं है, वहीं गर्मी के मौसम में हैंडपंप भी जवाब देने लगे हैं, जिसके चलते लोगों को मिलकर 600 रुपये खर्च कर टैंकरों से पानी मंगवाना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों को पढ़ाई छोड़कर पानी लाने जाना पड़ता है और परिवारों का बड़ा हिस्सा दिनभर केवल पेयजल व्यवस्था में ही लगा रहता है, साथ ही वर्षों से खराब पाइपलाइन और वाल्वों की मरम्मत न होने से समस्या और बढ़ गई है।
खड़रियापुरा और जाजीपुरा जैसे आदिवासी क्षेत्रों में हालात और भी खराब हैं, जहां नल-जल योजना का लाभ आज तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाया है, जबकि इसका असर अस्पताल और शासकीय आवासों तक में साफ दिखाई देता है।
अस्पताल में कार्यरत स्वास्थ्य कर्मियों के अनुसार पानी की कमी के कारण कामकाज प्रभावित हो रहा है और लंबे समय से यह समस्या बनी हुई है, जो गर्मी में और गंभीर हो जाती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नियमित बिल भुगतान के बावजूद उन्हें पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है और कई बार गंदे पानी की आपूर्ति भी की जाती है, जिससे असंतोष बढ़ता जा रहा है।
वहीं जिम्मेदार प्रतिनिधियों का कहना है कि पहाड़ी क्षेत्र और तकनीकी कारणों से जल आपूर्ति में बाधाएं आती हैं तथा सुधार के प्रयास किए जा रहे हैं, हालांकि स्थायी समाधान के लिए व्यापक स्तर पर सुधार की आवश्यकता बताई जा रही है।











