कोलकाता, 03 जून ।
पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी आंतरिक संघर्ष के बीच एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है, जहां पार्टी से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बंद्योपाध्याय को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता प्रदान कर दी गई है।
विधानसभा अध्यक्ष की स्वीकृति के बाद उन्हें नेता प्रतिपक्ष के लिए निर्धारित कक्ष भी आवंटित कर दिया गया और उसकी चाबी उनके हवाले कर दी गई, जिससे सदन की राजनीति में नया मोड़ आ गया है।
ऋतब्रत बंद्योपाध्याय ने दावा किया है कि तृणमूल के निर्वाचित विधायकों का बड़ा हिस्सा उनके समर्थन में है और उनके अनुसार लगभग 60 विधायक उनके साथ खड़े हैं, जिनमें से अधिकांश के समर्थन पत्र भी प्रस्तुत किए जा चुके हैं।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि उनकी ओर से विधानसभा में नई टीम का गठन किया गया है, जिसमें आख़रुज्जामान को मुख्य सचेतक तथा जावेद अहमद खान, सबीना यासमीन, शिउली साहा और संदीपन साहा को उपनेता नियुक्त किया गया है।
ऋतब्रत ने कहा कि उनका समूह सामूहिक निर्णय प्रक्रिया में विश्वास रखता है और विपक्ष की भूमिका को जनहित के मुद्दों पर प्रभावी ढंग से निभाया जाएगा, साथ ही उन्होंने वरिष्ठ नेतृत्व से भी संवाद बनाए रखने की बात कही।
इस बीच पार्टी के भीतर नेतृत्व चयन को लेकर पहले से चल रहे विवाद और कथित हस्ताक्षर जालसाजी के आरोपों ने स्थिति को और जटिल बना दिया है, जिसकी जांच संबंधित एजेंसियों द्वारा की जा रही है।
उधर पार्टी के भीतर शीर्ष स्तर पर बैठकें भी जारी हैं, जिससे तृणमूल कांग्रेस में चल रही अंदरूनी खींचतान और नेतृत्व संघर्ष खुलकर सामने आ गया है।











