मध्यपूर्व, 29 मई ।
अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष कूटनीतिक बातचीत में तेजी आई है, जिसमें दोनों पक्ष मौजूदा संघर्षविराम को बढ़ाने और होर्मुज जलडमरूमध्य को पुनः खोलने के लिए 60-दिवसीय प्रारंभिक समझौते के मसौदे पर विचार कर रहे हैं। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा है कि वार्ताकार प्रारंभिक समझौते के बेहद करीब हैं, हालांकि अंतिम मंजूरी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मिलना बाकी है।
ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार अभी कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है और तेहरान ठोस कार्रवाई की मांग कर रहा है। इस कूटनीतिक पहल में कतर की मध्यस्थता भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है, जहां हाल ही में अमेरिका और कतर के बीच सीधी बातचीत हुई है।
खाड़ी सहयोग परिषद के देश इस स्थिति को लेकर सतर्क हैं, क्योंकि उनके अनुसार संघर्षविराम टूटना केवल कूटनीतिक विफलता नहीं बल्कि रणनीतिक संकट साबित हो सकता है। इन देशों की महत्वपूर्ण अवसंरचना, जल शोधन संयंत्र और समुद्री व्यापार मार्ग सीधे जोखिम में बने हुए हैं।
कतर ने विशेष मध्यस्थ दल को तेहरान भेजकर होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री नियमों को लेकर अंतिम मतभेद सुलझाने की कोशिश तेज कर दी है। साथ ही एक एस्क्रो तंत्र तैयार करने पर भी काम चल रहा है, जिसके तहत ईरानी धनराशि को केवल मानवीय जरूरतों के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा, ताकि अमेरिका और ईरान दोनों की चिंताओं को संतुलित किया जा सके।
इस समझौते में लेबनान से जुड़ा एक पेचीदा पहलू भी सामने आया है, जहां इजरायल की सैन्य गतिविधियां स्थिति को जटिल बना रही हैं। वर्तमान मसौदे में लेबनान का मुद्दा अलग से हल नहीं किया गया है, जिससे किसी भी क्षेत्रीय तनाव के बढ़ने पर पूरा समझौता प्रभावित हो सकता है।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्वीकार किया कि ऐसे संघर्षविराम हमेशा जटिल होते हैं, जबकि अमेरिकी विदेश मंत्री ने इसे सीमित प्रगति बताया है। वर्तमान में क्षेत्र न तो पूर्ण युद्ध की स्थिति में है और न ही स्थायी शांति में, जिससे समझौते की स्थिरता पर सवाल बने हुए हैं।












