रांची, 02 जून।
राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) की अधिग्रहीत भूमि से जुड़े चर्चित फर्जीवाड़ा मामले में आरोपित प्रमोद कुमार महतो की अग्रिम जमानत याचिका पर मंगलवार को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की विशेष अदालत में सुनवाई हुई। एसीबी ने अदालत से जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय का आग्रह किया, जिसे स्वीकार करते हुए अदालत ने सुनवाई स्थगित कर दी और मामले की अगली सुनवाई के लिए 10 जून की तिथि निर्धारित की है।
एसीबी ने अदालत को सूचित किया कि मामले की केस डायरी और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्यों को व्यवस्थित तरीके से प्रस्तुत करने के लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता है। गौरतलब है कि इस मामले में एसीबी ने पूर्व में 7 अप्रैल को राजकिशोर बड़ाईक, कार्तिक बड़ाईक, राजेश झा और चेतन कुमार को गिरफ्तार किया था। जांच के अनुसार, आरोपितों ने मिलीभगत कर रिम्स की 9.65 एकड़ अधिग्रहीत सरकारी भूमि को निजी संपत्ति दर्शाने के लिए फर्जी वंशावली और दस्तावेज तैयार किए थे।
यह जमीन वर्ष 1964-65 में सरकारी उपयोग के लिए अधिग्रहित की गई थी, जिस पर बाद में अवैध कब्जा कर अपार्टमेंट, दुकानें और मकान निर्मित कर दिए गए थे। झारखंड उच्च न्यायालय के कड़े रुख के बाद प्रशासन ने इन अवैध निर्माणों को ध्वस्त किया था। उच्च न्यायालय के निर्देश पर ही एसीबी ने 5 जनवरी को इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की थी। जांच एजेंसी का मानना है कि यह केवल अवैध कब्जे का मामला नहीं, बल्कि सरकारी रिकॉर्ड में बड़े पैमाने पर हेरफेर का संगठित अपराध है। अब सबकी निगाहें 10 जून को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं।










