नई दिल्ली, 4 जून।
सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि किसी उम्मीदवार द्वारा अपनी उच्च शैक्षणिक योग्यता छिपाकर कम योग्यता के लिए निर्धारित पद पर नियुक्ति प्राप्त करना स्वीकार्य नहीं माना जा सकता। न्यायालय ने कहा कि ऐसी नियुक्तियां न केवल नियमों के विपरीत हैं, बल्कि पात्र अभ्यर्थियों के अवसरों को भी प्रभावित करती हैं।
न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और आर. महादेवन की पीठ ने इस मामले में मद्रास उच्च न्यायालय के वर्ष 2025 के फैसले को निरस्त कर दिया। उच्च न्यायालय ने सिंडिकेट बैंक में अटेंडेंट पद पर नियुक्त एक व्यक्ति के पक्ष में निर्णय दिया था, जिसने नौकरी हासिल करने के दौरान अपनी स्नातक डिग्री का उल्लेख नहीं किया था।
पीठ ने कहा कि कम शैक्षणिक योग्यता वाले पदों का उद्देश्य उन अभ्यर्थियों को अवसर देना है, जिनकी योग्यता निर्धारित सीमा के अनुरूप है। ऐसे पदों पर अधिक योग्य उम्मीदवारों का प्रवेश चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता और अवसरों की समानता को प्रभावित करता है।
न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि केवल अधिक शैक्षणिक योग्यता रखने से किसी व्यक्ति को कम योग्यता वाले पद पर नियुक्ति का स्वत: अधिकार प्राप्त नहीं हो जाता। नियमों और पात्रता शर्तों का पालन सभी उम्मीदवारों के लिए समान रूप से आवश्यक है।






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