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संपादकीय
05 Jun, 2026

आग से ज्यादा खतरनाक लापरवाही: कब टूटेगा मौतों का सिलसिला?

दिल्ली के मालवीय नगर होटल अग्निकांड में 21 लोगों की मौत के बाद सुरक्षा मानकों की अनदेखी और प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल उठे हैं।

नई दिल्ली, 5 जून।

दिल्ली के मालवीय नगर स्थित एक होटल में लगी भीषण आग ने एक बार फिर देश के शहरी सुरक्षा तंत्र की भयावह सच्चाई उजागर कर दी है। इस हादसे में 21 लोगों की मौत हो गई, जिनमें विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। यह केवल एक अग्निकांड नहीं, बल्कि नियमों की अनदेखी, प्रशासनिक लापरवाही और सुरक्षा मानकों के प्रति उदासीनता का दुखद परिणाम है।

प्रारंभिक जानकारी बताती है कि जिस इमारत को सीमित कमरों के संचालन की अनुमति थी, वहां निर्धारित संख्या से कई गुना अधिक कमरे चलाए जा रहे थे। अग्निशमन अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) नहीं था, खिड़कियां सीलबंद थीं, निकास मार्ग बाधित थे और सुरक्षा इंतजाम नाकाफी थे। ऐसे में आग लगने के बाद भवन कुछ ही मिनटों में मौत के जाल में बदल गया। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि यह सब वर्षों तक अधिकारियों की नजर से कैसे बचा रहा?

हर बड़े अग्निकांड के बाद जांच, मुआवजा और कार्रवाई की घोषणाएं होती हैं, लेकिन कुछ समय बाद सब कुछ सामान्य हो जाता है। यही कारण है कि दिल्ली, मुंबई, सूरत, कोलकाता और देश के अन्य शहरों में ऐसे हादसे बार-बार हो जाते हैं। यदि नियमों का पालन समय रहते सुनिश्चित किया जाता, तो शायद इतने परिवारों को अपने प्रियजनों को न खोना पड़ता।

इस घटना में स्थानीय नागरिकों की भूमिका उम्मीद की किरण बनकर सामने आई। गद्दे और रजाइयां बिछाकर लोगों की जान बचाने वाले व्यापारियों और अपनी जान जोखिम में डालकर बचाव में जुटे स्थानीय लोगों ने मानवीय संवेदनाओं का श्रेष्ठ उदाहरण प्रस्तुत किया। यह विडंबना है कि कई बार आम नागरिकों की तत्परता व्यवस्था की तैयारियों से अधिक प्रभावी साबित होती है।

दिल्ली पुलिस द्वारा गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया जाना आवश्यक कदम है, लेकिन केवल एफआईआर (FIR) से समस्या का समाधान नहीं होगा। जिम्मेदारी तय करनी होगी कि अवैध निर्माण, सुरक्षा मानकों के उल्लंघन और बिना आवश्यक अनुमति के संचालन को किसने नजरअंदाज किया। दोष केवल भवन मालिकों का नहीं, बल्कि उन संस्थाओं का भी है, जिनकी जिम्मेदारी निगरानी और अनुपालन सुनिश्चित करना है।

उपराज्यपाल द्वारा अग्नि सुरक्षा मानकों की जांच के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्णय स्वागतयोग्य है, पर इसकी सफलता कार्रवाई की गंभीरता पर निर्भर करेगी। यदि यह अभियान भी औपचारिकता बनकर रह गया, तो अगली त्रासदी केवल समय का प्रश्न होगी।

मालवीय नगर का हादसा चेतावनी है कि शहरी विकास केवल ऊंची इमारतों और व्यावसायिक विस्तार का नाम नहीं है। सुरक्षा, जवाबदेही और नियमों का कठोर पालन ही किसी शहर को वास्तव में सुरक्षित बनाते हैं। जब तक नियमों का उल्लंघन लाभ का सौदा और अनुपालन बोझ माना जाता रहेगा, तब तक आग की लपटें केवल इमारतों को नहीं, बल्कि व्यवस्था की विश्वसनीयता को भी जलाती रहेंगी।

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