भोपाल, 5 जून।
5 जून 1947 को बोया गया पत्रकारिता का एक बीज आज विशाल वटवृक्ष का रूप ले चुका है। 79 वर्षों की अविराम यात्रा पूरी कर नईदुनिया 5 जून 2026 को अपने 80वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। यह अवसर केवल एक संस्थान की उपलब्धि का नहीं, बल्कि पत्रकारिता की उस परंपरा के सम्मान का है जिसने पीढिय़ों तक पाठकों का विश्वास अर्जित किया और समाज की धड़कनों को अभिव्यक्ति दी।
देश की स्वतंत्रता से ठीक पहले स्वाधीनता संग्राम की चेतना और राष्ट्र निर्माण के संकल्प के साथ स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वर्गीय श्री नरेंद्र तिवारी, बाबू लाभचंद छजलानी और श्री बसंतीलाल सेठिया ने नईदुनिया की स्थापना की थी। इन दूरदर्शी संस्थापकों ने पत्रकारिता को केवल मिशन नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व का माध्यम माना। यही कारण है कि नईदुनिया की बुनियाद जनसरोकार, निष्पक्षता और लोकहित के मूल्यों पर रखी गई, जो आज भी इसकी पहचान बने हुए हैं।
स्वतंत्र भारत की यात्रा के साथ-साथ नईदुनिया ने भी अपना विस्तार किया और समय के हर महत्वपूर्ण पड़ाव का साक्षी बना। देश ने विभाजन का दर्द देखा, लोकतंत्र को परिपक्व होते देखा, आपातकाल का कठिन दौर देखा, आर्थिक उदारीकरण और डिजिटल क्रांति का साक्षी बना। इन सभी परिवर्तनों के बीच नईदुनिया ने अपने पाठकों को केवल समाचार ही नहीं, बल्कि घटनाओं को समझने की दृष्टि भी प्रदान की। यही कारण है कि हिंदी पत्रकारिता में नईदुनिया का नाम केवल एक समाचार पत्र के रूप में नहीं, बल्कि विश्वास के पर्याय के रूप में लिया जाता है।
नईदुनिया को हिंदी पत्रकारिता का 'स्कूल ऑफ जर्नलिज्म भी कहा जाता है। दशकों तक यह केवल समाचारों का मंच नहीं अपितु प्रतिभाशाली पत्रकारों, संपादकों और चिंतकों की ऐसी पाठशाला बना, जहां से अनेक प्रख्यात पत्रकारों ने अपनी यात्रा प्रारंभ की। देश के कई प्रतिष्ठित संपादकों और पत्रकारों ने नईदुनिया में कार्य करते हुए पत्रकारिता के मूल्यों को सीखा और आगे चलकर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। समाचारों की विश्वसनीयता, भाषा की शालीनता, जनपक्षधर दृष्टिकोण और संपादकीय साहस ने नईदुनिया को हिंदी पत्रकारिता की एक विशिष्ट संस्था के रूप में स्थापित किया।
नईदुनिया की पहचान केवल एक समाचार पत्र के रूप में नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश की सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक चेतना के विश्वसनीय दस्तावेज के रूप में स्थापित हुई है। प्रदेश के गांवों, कस्बों और शहरों की धड़कनों को समझते हुए इसने जनजीवन से जुड़े मुद्दों को हमेशा प्रमुखता दी। किसानों की चिंता हो, युवाओं की आकांक्षाएं हों, विकास की संभावनाएं हों या व्यवस्था की चुनौतियां, नईदुनिया ने हर दौर में समाज की आवाज को मुखरता से अभिव्यक्त किया। यही कारण है कि पीढिय़ां बदलीं, समय बदला और तकनीक बदली, लेकिन पाठकों का भरोसा नईदुनिया पर अडिग रहा।
इसी गौरवशाली परंपरा के विस्तार के रूप में लगभग 41 वर्ष पूर्व नईदुनिया के भोपाल संस्करण का प्रकाशन प्रारंभ हुआ और करीब 13 वर्ष पूर्व सागर संस्करण की शुरुआत हुई। यह विस्तार केवल नए संस्करणों का प्रकाशन नहीं था, बल्कि उन मूल संस्थापकीय आदर्शों को प्रदेश के और अधिक पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास था, जिनके आधार पर 5 जून 1947 को नईदुनिया की नींव रखी गई थी।
स्वर्गीय श्री नरेंद्र तिवारी की विरासत को आगे बढ़ाते हुए तिवारी परिवार आज भोपाल और सागर संस्करणों का सफलतापूर्वक सतत् संचालन कर रहा है। इन संस्करणों के माध्यम से नईदुनिया की वही मूल पत्रकारिता परंपरा, वही जनसरोकार और वही सामाजिक प्रतिबद्धता निरंतर प्रवाहित हो रही है, जिसने इस समाचार पत्र को लाखों पाठकों के विश्वास का आधार बनाया। आज आप जो नईदुनिया अपने हाथों में लिए हुए हैं, वह केवल एक संस्करण नहीं, बल्कि 5 जून 1947 को शुरू हुई उसी ऐतिहासिक यात्रा की सतत कड़ी है। संस्थापकों के सपनों, मूल्यों और पत्रकारिता धर्म को आगे बढ़ाने का यह दायित्व आज भी उतनी ही निष्ठा से निभाया जा रहा है, जितनी निष्ठा के साथ इसकी शुरुआत की गई थी।
आज पत्रकारिता अभूतपूर्व परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। डिजिटल माध्यमों का विस्तार, सोशल मीडिया की तीव्रता और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी नई तकनीकों ने सूचना जगत का स्वरूप बदल दिया है। खबरों की गति बढ़ी है, लेकिन विश्वसनीयता की चुनौती भी उतनी ही बड़ी है। ऐसे समय में नईदुनिया की 79 वर्षों की विरासत और अधिक प्रासंगिक हो जाती है। क्योंकि पाठक को केवल सूचना नहीं, बल्कि प्रामाणिक और संतुलित जानकारी भी चाहिए।
80वें वर्ष में प्रवेश करते हुए नईदुनिया के सामने अवसर भी हैं और चुनौतियां भी। बदलते समय के अनुरूप नवाचार आवश्यक है, लेकिन पत्रकारिता के बुनियादी मूल्य-सत्यनिष्ठा, निष्पक्षता और जनहित-ही उसकी सबसे बड़ी ताकत बने रहेंगे। यही मूल्य नईदुनिया की पहचान रहे हैं और भविष्य की दिशा भी तय करेंगे।
79 वर्षों की इस गौरवशाली यात्रा पर नईदुनिया परिवार, अपने वर्तमान और पूर्व कर्मियों तथा करोड़ों पाठकों को हार्दिक बधाई देता है। विश्वास, विचार और जनसरोकार की यह विरासत आने वाले वर्षों में और सशक्त हो, समाज और लोकतंत्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करती रहे,
इसी कामना के साथ ..... आपका
अपूर्व तिवारी
संपादक







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