मधुबनी, 16 मई।
जिले के मुख्यालय सहित ग्रामीण क्षेत्रों में शनिवार को वट सावित्री व्रत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया, जहां अहिवात सौभाग्यवती महिलाओं ने वट वृक्ष की पूजा-अर्चना कर अपने पति की दीर्घायु की कामना की।
महिलाओं ने इस अवसर पर वट सावित्री व्रत को सांस्कृतिक और शास्त्रीय परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए इसे वैवाहिक जीवन की सुरक्षा और सौभाग्य से जुड़ा पर्व बताया, विशेषकर नवविवाहिताओं के लिए इस व्रत और वट वृक्ष पूजन को परंपरागत आस्था से जोड़ा गया।
शास्त्रीय तिथि के अनुसार शनिवार को महिलाओं ने वट वृक्ष के नीचे एकत्र होकर उत्साह के साथ पूजा की और भारतीय संस्कृति में पति की आयु की रक्षा के लिए धार्मिक अनुष्ठानों की प्रासंगिकता को महत्वपूर्ण माना।
पूजा के दौरान पंचदेव उपासना, आदि शक्ति आराधना के साथ-साथ वृक्ष, नदी, आकाश, सूर्य, चंद्रमा और नवग्रहों की पूजा की परंपरा का उल्लेख करते हुए इसे प्राचीन भारतीय परंपरा का हिस्सा बताया गया, जहां लोक आस्था और धार्मिक व्यवहार गहराई से जुड़े हैं।
महिलाओं ने लाल धागे से वट वृक्ष को लपेटकर, जल अर्पित कर, भींगा चना, मिठाई, फल-फूल, बेलपत्र, दूर्वा और गंगाजल से पूजा कर उपवास के साथ विधिवत आराधना की और सौभाग्य तथा पति की लंबी आयु की प्रार्थना की।
इस दौरान वट वृक्ष की पूजा को पर्यावरण संरक्षण से भी जोड़ते हुए वृक्षों के महत्व और ऑक्सीजन संतुलन में उनकी भूमिका को रेखांकित किया गया, साथ ही पीपल और वट वृक्ष को धार्मिक और पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया गया।
साथ ही यह भी कहा गया कि भारतीय परंपरा में नदियों, वृक्षों और प्राकृतिक तत्वों की पूजा की परंपरा सदियों पुरानी है, जिसे गंगा, कोसी और कमला जैसी नदियों की आस्था से भी जोड़ा जाता है, और इसे सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा माना गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार वट और पीपल वृक्ष पर्यावरण संतुलन में अहम भूमिका निभाते हैं और धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ यह प्रकृति संरक्षण का भी संदेश देते हैं, जिसे वर्तमान समय में और अधिक प्रासंगिक माना जा रहा है।











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