नई दिल्ली, 15 मई।
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया शुक्रवार को भारी गिरावट के साथ अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। रुपये में करीब पचास पैसे की कमजोरी दर्ज की गई, जिसके बाद यह 96.14 के स्तर पर आ गया।
इसके पहले कारोबारी सत्र में भी रुपया कमजोर होकर 95.64 तक फिसल चुका था, जबकि इससे पहले दिसंबर 2025 में यह पहली बार 90 के स्तर को पार कर चुका था और तब से लगातार दबाव में बना हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, होर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति बाधित होने की आशंका और कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी रुपये की कमजोरी का प्रमुख कारण है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 107 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है, जिससे आयात बिल बढ़ने और अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव की स्थिति बन रही है।
इसके अलावा विदेशी निवेशकों द्वारा लगातार पूंजी निकासी और वैश्विक बाजार में मजबूत होते डॉलर ने भी रुपये की स्थिति को और कमजोर किया है।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि रुपये की कमजोरी का असर आने वाले समय में महंगाई पर पड़ सकता है, जिससे घरेलू स्तर पर आर्थिक चुनौतियां बढ़ने की आशंका है।









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