प्रयागराज, 05 मई।
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा है कि पिछले दस वर्षों में भारत ने रक्षा क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है और देश रक्षा उपकरणों के बड़े आयातक से एक उभरते हुए निर्यातक के रूप में विकसित हुआ है।
उन्होंने बताया कि इस अवधि में भारत का रक्षा उत्पादन बढ़कर लगभग 1.54 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो 174 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। साथ ही रक्षा निर्यात 23,622 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जिसमें 34 गुना वृद्धि दर्ज की गई है।
उन्होंने यह भी बताया कि कुल निर्यात में लगभग 15 हजार करोड़ रुपये का योगदान निजी क्षेत्र से आया है, जो सहयोगात्मक रक्षा विनिर्माण की दिशा में बड़े परिवर्तन का संकेत देता है।
प्रयागराज में आयोजित नॉर्थ टेक सिम्पोजियम 2026 को संबोधित करते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि आज युद्ध केवल पारंपरिक शक्ति पर आधारित नहीं रह गया है, बल्कि यह उन्नत तकनीकों, त्वरित डेटा प्रणालियों और स्वचालित प्लेटफार्मों पर निर्भर हो गया है।
उन्होंने कहा कि इस बदलाव ने भारत की परिचालन क्षमता और वैश्विक प्रतिष्ठा को नई ऊंचाई दी है।
सरकारी समर्थन का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि बजट 2026-27 में रक्षा क्षेत्र के लिए 6 लाख 81 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 9.5 प्रतिशत अधिक है।
डॉ. सिंह ने कहा कि अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और क्वांटम तकनीक जैसे क्षेत्र अब रक्षा तैयारियों का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। उन्होंने बताया कि भारत ने क्वांटम सुरक्षित संचार तकनीक में भी तेजी से प्रगति की है, जो भविष्य की रक्षा प्रणाली में अहम भूमिका निभाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि विभिन्न सुधारों के चलते उद्योग जगत की भागीदारी बढ़ी है, जिससे नवाचार को गति मिली है और स्वदेशी तकनीकों का विस्तार संभव हुआ है।
कार्यक्रम के बारे में जानकारी देते हुए बताया गया कि प्रयागराज में 4 से 6 मई तक आयोजित नॉर्थ टेक सिम्पोजियम 2026 का विषय “रक्षा त्रिवेणी संगम – जहां प्रौद्योगिकी, उद्योग और सैनिक कौशल का संगम होता है” रखा गया है। यह आयोजन भारतीय सेना की उत्तरी और केंद्रीय कमानों तथा सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स के सहयोग से किया जा रहा है।









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