इंदौर, 11 मई।
अंगदान और देहदान को लेकर समाज में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से इंदौर में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े ने की, जिसमें उन्होंने अंगदान की प्रक्रिया और इससे जुड़े प्रेरणादायक अनुभव साझा किए।
बैठक में संभागायुक्त ने इंदौर में अंगदान और देहदान के क्षेत्र में हो रहे कार्यों की विस्तार से जानकारी दी और इन्फ्लुएंसर्स से समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करने तथा जागरूकता फैलाने में सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया।
उन्होंने बताया कि अंगदान एक अत्यंत पवित्र और जीवनदान देने वाला कार्य है, जिससे कई लोगों को नया जीवन मिलता है। उन्होंने दक्षिण भारत के शहरों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां इस दिशा में बेहतर कार्य हो रहा है, वहीं इंदौर मध्य प्रदेश में अंगदान और देहदान के क्षेत्र में अग्रणी बनकर उभरा है।
संभागायुक्त ने यह भी बताया कि एयर एम्बुलेंस सुविधा के कारण अंग प्रत्यारोपण प्रक्रिया और अधिक प्रभावी हुई है। गॉड ऑफ ऑनर की शुरुआत के बाद अंगदान के मामलों में 25 प्रतिशत से अधिक वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के माध्यम से अंधविश्वास और भय को दूर किया जा सकता है।
बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि इंदौर में वर्ष 2015 में पहला ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया था और अब तक 67 बार ग्रीन कॉरिडोर तैयार किया जा चुका है। शहर नेत्रदान और त्वचा दान के मामलों में भी देश में अग्रणी स्थान पर है।
वर्ष 2024 में 2237 नेत्रदान हुए, जो 2025 में बढ़कर 2748 हो गए हैं। वहीं अंगदान की अनुमति भी 135 से बढ़कर 202 तक पहुंच गई है। बताया गया कि मृत्यु से पूर्व और ब्रेन डेड की स्थिति में विभिन्न अंगों का दान संभव है, जिससे कई लोगों को नया जीवन मिल सकता है।
बैठक में यह भी साझा किया गया कि इंदौर में दो बार हाथ प्रत्यारोपण किया गया है, जिसमें एक हाथ एक युवा इंजीनियर को लगाया गया, जबकि दूसरा गुजरात की एक युवती को प्रत्यारोपित किया गया।
इस अवसर पर अंगदान समिति के सदस्य और शहर के करीब 15 सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर उपस्थित रहे।



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