नई दिल्ली, 24 मार्च।
दिल्ली के दक्षिण-पश्चिम जिले की साइबर थाना पुलिस ने निवेश के नाम पर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 11 आरोपितों को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने एक वरिष्ठ नागरिक से “हाई रिटर्न” का झांसा देकर 22.67 लाख रुपये की ठगी की थी।
पुलिस उपायुक्त अमित गोयल ने बताया कि गिरफ्तार आरोपितों में तजिंदर सिंह उर्फ लकी, आशीष सैनी, शिव दयाल सिंह, शिवा, गिरिराज किशोर, प्रतिभा उर्फ पायल, सतीश, रामदेव सांगला, प्रवीण कुमावत, दीपक मेवाड़ा और त्रिलोक चंद नायक शामिल हैं। यह गिरोह दिल्ली और मुंबई से संगठित रूप से साइबर ठगी करता रहा।
मामला 21 नवंबर 2025 का है, जब 60 वर्षीय ए. श्रीनिवासन ने शिकायत दी थी कि फेसबुक पर वित्त मंत्री के भाषण का दुरुपयोग कर ‘एआई ट्रेडिंग’ के नाम पर निवेश का झांसा दिया गया। लिंक के माध्यम से रजिस्ट्रेशन कराए जाने के बाद आरोपितों ने खुद को निवेश सलाहकार बताया और ‘मुद्राओन’ व अन्य प्लेटफॉर्म पर निवेश के लिए प्रेरित किया, फिर बड़ी कंपनी का नाम देकर पैसे ट्रांसफर कर फरार हो गए।
जांच में इंस्पेक्टर प्रवेश कौशिक के नेतृत्व में टीम ने मनी ट्रेल, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, डिजिटल फुटप्रिंट और तकनीकी निगरानी के जरिए रोहिणी और नेताजी सुभाष प्लेस में सक्रिय गिरोह का पता लगाया। दोनों जगह छापेमारी कर पांच आरोपितों को गिरफ्तार किया गया, जहां से फर्जी बैंक खातों का पूरा सेटअप मिला। पूछताछ में खुलासा हुआ कि गिरोह ‘फ्रंट ऑफिस’ और ‘बैकएंड’ के जरिए म्यूल अकाउंट तैयार कर ठगी की रकम अलग-अलग खातों में घुमाता था।
जांच में सामने आया कि ठगी की रकम कई परतों से होकर मुंबई के एक बैंक खाते में जाती थी। इसके बाद पुलिस ने राजस्थान और मुंबई में कार्रवाई कर चार और आरोपितों को गिरफ्तार किया। आरोपितों ने बताया कि वे फर्जी खाते तैयार कर अन्य साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराते थे, जो कंबोडिया से भारतीय नागरिकों को निशाना बनाते थे।
अधिकारियों ने आरोपितों के कब्जे से 40 मोबाइल फोन, 92 फर्जी सिम कार्ड, 39 पासबुक/चेकबुक, 27 एटीएम कार्ड, 4 पैन कार्ड, एक लैपटॉप, एक डेस्कटॉप, 2 पीओएस मशीन, 6 यूपीआई स्कैनर, एक प्रिंटर और फर्जी दस्तावेज बरामद किए हैं।












