तेहरान, 29 अप्रैल।
ईरान ने अमेरिका के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र में औपचारिक शिकायत दर्ज कराते हुए उस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ईरानी पक्ष का कहना है कि अमेरिका ने उसके जहाजों को जब्त कर अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन किया है, जिसे उसने समुद्री डकैती की कार्रवाई बताया है।
संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत अमीर सईद इरावानी ने बताया कि अमेरिका ने ‘मैजेस्टिक’ और ‘टिफनी’ नामक जहाजों को अपने कब्जे में लिया और लगभग अड़तीस लाख बैरल ईरानी तेल भी जब्त कर लिया। उनके अनुसार यह कार्रवाई पूरी तरह गैरकानूनी है और वैश्विक व्यापार व्यवस्था में हस्तक्षेप के समान है।
ईरान ने आरोप लगाया है कि अमेरिका की यह कार्रवाई संयुक्त राष्ट्र चार्टर, अंतरराष्ट्रीय कानून तथा समुद्री कानूनों का खुला उल्लंघन है। ईरानी प्रतिनिधि ने चेतावनी दी कि यदि ऐसे कदमों को नहीं रोका गया तो यह दुनिया के लिए एक खतरनाक उदाहरण बन सकता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय कानून व्यवस्था कमजोर पड़ सकती है।
ईरान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से मांग की है कि वह अमेरिका के इस कदम की निंदा करे और इस मामले में आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करे।
इसी बीच, संयुक्त अरब अमीरात ने एक बड़ा निर्णय लेते हुए एक मई से पचास वर्ष से अधिक समय बाद तेल उत्पादक देशों के संगठन ओपेक से अलग होने की घोषणा की है। यह संगठन दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक देशों का समूह माना जाता है।
उधर, परमाणु मुद्दे पर बातचीत को लेकर ईरान द्वारा दिए गए प्रस्ताव को अमेरिका ने अस्वीकार कर दिया है। ईरान ने होर्मुज जलमार्ग को खोलने और जहाजों की आवाजाही शुरू करने का सुझाव दिया था, जिसके बाद परमाणु वार्ता आगे बढ़ने की बात कही गई थी।
इसके अलावा ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची रूस यात्रा समाप्त कर मंगलवार सुबह इस्लामाबाद पहुंचे। पिछले अड़तालीस घंटों में यह उनका तीसरा पाकिस्तान दौरा बताया जा रहा है।
आर्थिक स्थिति पर ईरान सरकार ने बताया है कि संघर्ष के कारण देश में सीधे तौर पर कम से कम दस लाख नौकरियां समाप्त हो गई हैं, जबकि भविष्य में एक करोड़ से अधिक रोजगारों पर संकट मंडरा रहा है।
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी देखी गई है और लगातार सातवें दिन बढ़ोतरी के साथ ब्रेंट क्रूड का भाव एक सौ दस डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है।











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