धर्म / अध्यात्म
29 Apr, 2026

लेह में भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष पहुंचे, बुद्ध पूर्णिमा पर विशेष आयोजन

लेह में विशेष विमान से पहुंचे भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों को बुद्ध पूर्णिमा पर विशेष कार्यक्रम के तहत आम दर्शन के लिए रखा जाएगा, जिसमें गृह मंत्री सहित कई अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है।

लेह, 29 अप्रैल

महात्मा बुद्ध के पवित्र अवशेषों को आम श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए भारतीय वायुसेना के विशेष विमान से बुधवार सुबह नई दिल्ली से लद्दाख की राजधानी लेह पहुंचाया गया, जहां कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच इन्हें हेड ऑफ स्टेट का दर्जा देते हुए लाया गया।

लेह के तकनीकी हवाई अड्डे पर पारंपरिक बौद्ध रीति-रिवाजों के अनुसार विभिन्न मठों के धर्मगुरुओं, भिक्षुओं और प्रशासनिक अधिकारियों ने मंत्रोच्चारण के साथ इन अवशेषों का स्वागत किया। विमान से उतारने के बाद विधिवत पूजा-अर्चना की गई और इन्हें चोगलमसर स्थित जेवेत्सल तक ले जाया गया।

हवाई अड्डे से जेवेत्सल तक लगभग दस किलोमीटर लंबे मार्ग पर हजारों श्रद्धालु सड़क किनारे खड़े होकर फूल-मालाओं के साथ दर्शन करते रहे। पूरे मार्ग को पारंपरिक रूप से सजाया गया था और कई स्थानों पर फूल वर्षा कर स्वागत किया गया।

लद्दाख के उपराज्यपाल ने इसे ऐतिहासिक क्षण बताते हुए कहा कि यह दिन बौद्ध अनुयायियों और स्थानीय लोगों के लंबे इंतजार के बाद आया है।

जेवेत्सल में पवित्र अवशेषों को विशेष सुरक्षा के बीच स्थापित किया गया है, जहां एक से पंद्रह मई तक आम जनता के लिए दर्शन की व्यवस्था की गई है। इस दौरान देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना को देखते हुए व्यापक तैयारियां की गई हैं।

प्रदर्शनी स्थल पर बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है, जिसमें पुलिस, अर्धसैनिक बल और खुफिया एजेंसियों की तैनाती शामिल है। पूरे क्षेत्र में सीसीटीवी निगरानी और ड्रोन से नजर रखी जा रही है, जबकि यातायात प्रबंधन के लिए विशेष व्यवस्था की गई है।

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए चिकित्सा शिविर, एम्बुलेंस, पेयजल, अस्थायी शौचालय और सार्वजनिक परिवहन की व्यवस्था की गई है। आयोजन स्थल पर एकीकृत नियंत्रण केंद्र से सभी व्यवस्थाओं की निगरानी की जा रही है।

बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर विशेष धार्मिक आयोजन के साथ प्रार्थना, ध्यान और अनुष्ठान किए जाएंगे। साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रमों में लद्दाख की पारंपरिक कला और संगीत प्रस्तुत किया जाएगा।

केंद्रीय गृह मंत्री के इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए लद्दाख पहुंचने की संभावना है। इसके साथ ही कई राज्यों के मुख्यमंत्री, विदेशी राजदूत और अंतरराष्ट्रीय बौद्ध संगठनों के प्रतिनिधियों के भी आने की संभावना है।

लेह शहर को इस अवसर पर विशेष रूप से सजाया गया है, जहां सड़कों, चौराहों और प्रमुख स्थलों को फूलों और रोशनी से सजाया गया है। स्थानीय कलाकार पारंपरिक वेशभूषा में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दे रहे हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल है।

जांस्कर क्षेत्र में भी इन पवित्र अवशेषों का प्रदर्शन किया जाएगा, जहां ग्यारह और बारह मई को श्रद्धालुओं के दर्शन की व्यवस्था की गई है।

ये अवशेष उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर स्थित पिपरहवा स्तूप से जुड़े हैं, जहां वर्ष 1898 में खुदाई के दौरान बुद्ध से संबंधित अवशेष और सामग्री प्राप्त हुई थी, जबकि बाद में भी कई महत्वपूर्ण खोजें की गईं।

बौद्ध परंपरा के अनुसार बुद्ध के महापरिनिर्वाण के बाद उनके अवशेषों को विभिन्न भागों में विभाजित कर स्तूपों में स्थापित किया गया था, जिन्हें सम्राट अशोक ने व्यापक रूप से संरक्षित कराया था।

औपनिवेशिक काल में इन अवशेषों का कुछ हिस्सा विदेशों और संग्रहालयों में पहुंचा, जबकि भारत में राष्ट्रीय संग्रहालय सहित विभिन्न स्थानों पर इन्हें संरक्षित किया गया है और समय-समय पर प्रदर्शित किया जाता रहा है।

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