नई दिल्ली, 14 मई।
भारतीय रेल वित्त निगम ने वित्त वर्ष 2025-26 में मजबूत वित्तीय नतीजों के साथ लाभ में बढ़ोतरी दर्ज की है। रेल मंत्रालय के अधीन नवरत्न सार्वजनिक उपक्रम ने कर पश्चात लाभ में 7.80 प्रतिशत की वृद्धि हासिल की। कंपनी का शुद्ध मुनाफा बढ़कर 7,009.17 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो इससे पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में 6,502 करोड़ रुपये था।
कंपनी की ओर से जारी वित्तीय आंकड़ों में बताया गया कि वित्त वर्ष 2025-26 रणनीतिक विस्तार के लिहाज से अहम साबित हुआ। पारंपरिक रेलवे वित्त पोषण व्यवस्था से आगे बढ़ते हुए संस्था ने बुनियादी ढांचा वित्त पोषण के अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी बढ़ाई। इस दौरान परिसंपत्ति प्रबंधन राशि रिकॉर्ड 4.85 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई। साथ ही कुल परिसंपत्तियों का आंकड़ा पहली बार 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया।
आईआरएफसी के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक मनोज कुमार दुबे के मुताबिक, वित्त वर्ष 26 कंपनी के लिए बदलाव लेकर आने वाला साल रहा। उन्होंने कहा कि विविधीकरण की रणनीति से बेहतर स्प्रेड और अधिक मार्जिन प्राप्त हुआ, जिससे शेयरधारकों को भी अतिरिक्त लाभ मिला। उन्होंने यह भी बताया कि कंपनी ने शून्य एनपीए बनाए रखने की अपनी परंपरा को कायम रखा है।
वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कंपनी ने 72,949 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी प्रदान की और लगभग 35,067 करोड़ रुपये का वितरण किया। रेलवे क्षेत्र के अतिरिक्त बिजली उत्पादन, नवीकरणीय ऊर्जा, ट्रांसमिशन, उर्वरक और रेलवे लिंक्ड बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में भी वित्त पोषण को बढ़ावा दिया गया।
इसी अवधि में डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के लिए 9,821 करोड़ रुपये की दीर्घकालिक रुपये आधारित सुविधा के जरिए विश्व बैंक ऋण का पुनर्वित्तपोषण किया गया, जिससे करीब 2,700 करोड़ रुपये की बचत संभव हुई। साथ ही हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड के लिए 12,842 करोड़ रुपये के पुनर्वित्तपोषण सौदे को भी पूरा किया गया।
कंपनी का नेट इंटरेस्ट मार्जिन बढ़कर 1.50 प्रतिशत तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 6 प्रतिशत अधिक है। आईआरएफसी का कहना है कि मेट्रो, पोर्ट और अन्य उभरते बुनियादी ढांचा क्षेत्रों में उपलब्ध अवसर आगामी वित्त वर्ष में विकास को और रफ्तार दे सकते हैं।








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