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संपादकीय
04 Nov, 2026

जनभागीदारी से स्वच्छता: नवाचार से मध्यप्रदेश ने बनाई नई पहचान

इंदौर की सफलता से लेकर सिंहस्थ 2028 की शून्य कचरा योजना तक, मध्यप्रदेश में जनभागीदारी और वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन स्वच्छता अभियान को नई दिशा दे रहे हैं।

भोपाल, 04 नवंबर।

मध्यप्रदेश में स्वच्छता की कहानी अब सड़कों की सफाई से आगे बढ़कर कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन, पुनः उपयोग और पर्यावरण के अनुकूल परियोजनाओं तक पहुंच गई है। इसी का परिणाम है कि इंदौर लगातार सात बार देश का सबसे स्वच्छ शहर बना। वहीं, प्रदेश को भी स्वच्छ सर्वेक्षण में कई बार सम्मान मिला। इंदौर की सफलता के पीछे कचरे का पृथक्करण, उससे खाद और बायोगैस बनाने तथा जनभागीदारी की अहम भूमिका रही है। इंदौर सुपर स्वच्छ लीग में शामिल हुआ, जबकि भोपाल बड़े शहरों की श्रेणी में दूसरे स्थान पर रहा। जबलपुर को सफाई मित्र सुरक्षित शहर के लिए राष्ट्रीय सम्मान मिला और उज्जैन ने भी सुपर स्वच्छ लीग में स्थान बनाया।

स्वच्छ सर्वेक्षण 2024-25 में स्वच्छता की राह में चुनौतियां भी सामने आई हैं। प्रदेश में स्वच्छ भारत मिशन शहरी 2.0 के तहत 3,680 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। स्वच्छता का स्तर बढ़ाने के लिए घरों से गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग एकत्र करना और आगे भी उनका पृथक्करण बनाए रखना नगरीय निकायों के लिए बड़ी चुनौती है। कचरे के प्रसंस्करण और निस्तारण की धीमी गति तथा गंदे पानी को बिना उपचार जलस्रोतों में मिलने से रोकना भी गंभीर समस्याएं हैं। आर्थिक संसाधनों की कमी से जूझ रहे नगरीय निकायों के सामने जिम्मेदारी बड़ी है।

उज्जैन में सिंहस्थ 2028 को शून्य कचरा यानी जीरो वेस्ट आयोजन बनाने की तैयारी है। इसके लिए व्यापक ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और स्वच्छता योजना तैयार करने के लिए निविदा जारी की गई है। प्रदेश के 109 नगरीय निकायों में चिह्नित 57 लाख टन पुराने कचरे में से 48 लाख टन से अधिक का प्रसंस्करण किया जा चुका है। इससे 509 एकड़ जमीन पुनः उपयोग के लिए उपलब्ध हुई है। इंदौर और ग्वालियर में संपीड़ित बायोगैस संयंत्र संचालित हैं, जबकि देवास, रतलाम, मुरैना, बुरहानपुर और खंडवा में पांच और संयंत्र स्थापित किए जा रहे हैं। इनका उद्देश्य जैविक कचरे को उपयोगी ईंधन में बदलना है। नगरीय निकायों से निकलने वाले अपशिष्ट जल के उपचार के लिए लगभग 350 परियोजनाएं क्रियान्वित की जा रही हैं। भविष्य में शहरों में उपचारित पानी की अलग पाइपलाइन बिछाने की भी योजना है।

स्वच्छता की कहानी केवल इंदौर तक सीमित नहीं है। भोपाल की अपनी ऐतिहासिक पहचान और विकास यात्रा रही है। आजादी के बाद भोपाल एक अलग रियासत था। नवाब हमीदुल्लाह खान इसे स्वतंत्र बनाए रखना चाहते थे, लेकिन बाद में उन्होंने विलय पत्र पर हस्ताक्षर कर दिए। जून 1949 में केंद्र सरकार ने भोपाल का प्रशासन संभाला। बाद में भोपाल पार्ट सी राज्य बना और फिर मध्यप्रदेश की राजधानी बना। इंदौर और भोपाल में जनभागीदारी के प्रयासों ने स्वच्छता को नई दिशा दी है। भोपाल के भानपुर में कभी कचरे का पहाड़ हुआ करता था, लेकिन आज वहां पार्क दिखाई देते हैं। यह बदलाव वर्षों की मेहनत और नागरिकों के सहयोग का परिणाम है।

स्वच्छता का स्तर बढ़ाने के लिए जनभागीदारी सबसे बड़ा मंत्र है। इंदौर ने यही किया। वहां लोगों ने गीला और सूखा कचरा अलग देने की आदत अपनाई, दुकानदारों ने प्लास्टिक के उपयोग को कम करने में सहयोग दिया और स्कूलों ने बच्चों को स्वच्छता का पाठ पढ़ाया। यही कारण है कि वहां सफाई केवल नगर निगम का काम नहीं, बल्कि नागरिकों की आदत बन गई है। मध्यप्रदेश के अन्य शहरों में भी इस मॉडल को अपनाना होगा। जब तक नागरिक स्वयं आगे नहीं आएंगे, तब तक कोई मशीन या योजना शहरों को पूरी तरह स्वच्छ नहीं बना सकती।

उज्जैन में सिंहस्थ 2028 को जीरो वेस्ट बनाने का लक्ष्य एक बड़ी पहल है। लाखों लोगों की उपस्थिति के बावजूद कचरे का प्रभावी प्रबंधन पूरे देश के लिए मिसाल बन सकता है। इसी तरह उपचारित पानी का उपयोग बगीचों और उद्योगों में करने से नर्मदा और अन्य नदियों पर दबाव कम होगा। पुराने कचरे के प्रसंस्करण से उपलब्ध हुई जमीन का उपयोग भी विकास के नए अवसर पैदा कर सकता है।

मध्यप्रदेश की स्वच्छता यात्रा बताती है कि स्वच्छता केवल झाड़ू लगाने का नाम नहीं, बल्कि सोच बदलने का प्रयास है। इसकी शुरुआत घर में कचरे को अलग करने से होती है और इसका असर पूरे प्रदेश की तस्वीर बदल सकता है। इंदौर ने रास्ता दिखाया है। अब भोपाल, जबलपुर, उज्जैन और छोटे नगरीय निकायों को भी इस दिशा में आगे बढ़ना होगा। जनभागीदारी और नवाचार साथ चलेंगे, तभी मध्यप्रदेश देश के सबसे स्वच्छ राज्यों में अपनी पहचान मजबूत कर सकेगा। स्वच्छता अंततः स्वास्थ्य, समृद्धि और सम्मान का आधार है।

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समय नकारात्मक परिणाम देने वाला बन रहा है। ले देकर की जा रही काम की कोशिश ठीक नहीं। कार्यक्षेत्र में आगे बढऩे में रुकावट का एहसास होगा। विरोधियों के सक्रिय होने की संभावना है। कारोबारी यात्रा को फिलहाल टालें। जो चल रहा है उसे सावधानीपूर्वक संभालें। शुभांक-1-3-6

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