कोलकाता, 07 मई।
जंगलमहल क्षेत्र में इस बार भाजपा को मिली बड़ी सफलता के बाद कूड़मी समाज की भूमिका को लेकर राजनीतिक चर्चा और अधिक तेज हो गई है। झाड़ग्राम, पुरुलिया, बांकुड़ा और पश्चिम मेदिनीपुर के कई हिस्सों में प्रभाव रखने वाले इस समुदाय ने चुनाव से पहले खुलकर तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ मतदान का आह्वान किया था।
विधानसभा चुनाव में झाड़ग्राम जिले की चारों सीटों पर तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद भाजपा नेताओं ने इस परिणाम के पीछे कूड़मी समाज के समर्थन को एक महत्वपूर्ण कारण बताया है। पार्टी का मानना है कि विभिन्न क्षेत्रों में समुदाय के मतदाताओं का रुख निर्णायक साबित हुआ।
बुधवार देर शाम जीत के जश्न में शामिल हुए भाजपा नेता देवाशीष कुंडू ने कहा कि जंगलमहल के सभी वर्गों का समर्थन भाजपा को मिला है और कूड़मी समाज की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस के पराजित उम्मीदवार अजीत महतो ने आरोप लगाया कि कुछ कूड़मी नेताओं ने भाजपा के साथ मिलकर काम किया और ईवीएम में गड़बड़ी से भाजपा को लाभ मिला, हालांकि भाजपा ने इन आरोपों को पूरी तरह नकार दिया है।
कूड़मी समाज लंबे समय से स्वयं को अनुसूचित जनजाति सूची में शामिल किए जाने की मांग करता आ रहा है और इसके लिए रेल तथा राष्ट्रीय राजमार्ग जाम सहित बड़े आंदोलन भी हुए हैं। वर्ष 2023 के पंचायत चुनाव से पहले गढ़ शालबनी में अभिषेक बनर्जी के काफिले पर हमले के आरोप में कूड़मी नेताओं की गिरफ्तारी के बाद तृणमूल और कूड़मी समाज के संबंधों में दूरी और बढ़ गई थी। पंचायत चुनाव में कई स्थानों पर निर्दलीय उम्मीदवारों की जीत ने भी इस बदलाव के संकेत दिए थे।
इस चुनाव में ‘आदिवासी कूड़मी समाज’, ‘कूड़मी समाज पश्चिम बंगाल’ और ‘आदिवासी नेगाचारी कूड़मी समाज’ के कई नेताओं को भाजपा के समर्थन में सक्रिय देखा गया। ‘कूड़मी समाज पश्चिम बंगाल’ के प्रदेश अध्यक्ष राजेश महतो भाजपा में शामिल होकर गोपीबल्लभपुर सीट से चुनाव जीतने में सफल रहे। इस पूरे क्षेत्र में कूड़मी मतदाताओं की संख्या लगभग चालीस प्रतिशत मानी जाती है।










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