भोपाल, 30 अप्रैल।
प्रदेश में सरकारी बीमा योजना के नाम पर एक बड़े स्तर का संगठित धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है, जिसमें अपराधियों के गिरोह ने योजना का दुरुपयोग करते हुए फर्जी दस्तावेजों के आधार पर करोड़ों रुपये की हेराफेरी को अंजाम दिया।
जांच में सामने आया कि गिरोह ने सुनियोजित तरीके से सैकड़ों फर्जी बैंक खाते खुलवाए और कई लोगों की जानकारी के बिना उनके नाम पर बीमा पॉलिसियां करवाईं। कुछ समय बाद इन्हीं लोगों को कागजों में मृत घोषित कर दिया गया और नगर निकायों से फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार कराए गए।
इसके बाद बीमा क्लेम की राशि सीधे गिरोह के खातों में ट्रांसफर कर ली गई, जबकि हैरान करने वाली बात यह सामने आई कि जिन लोगों को मृत दिखाया गया था, वे जांच में जीवित पाए गए।
यह पूरा नेटवर्क ग्वालियर, मुरैना और रतलाम जैसे शहरों तक फैला हुआ था। धोखाधड़ी की राशि को छिपाने के लिए पैसे दूर-दराज के एटीएम से निकाले गए, जिनमें सवाई माधोपुर और गंगानगर जैसे स्थान शामिल हैं, साथ ही कई रकम म्यूल खातों में ट्रांसफर की गई।
जांच में यह भी पाया गया कि कई मामलों में एक ही मोबाइल नंबर और ईमेल का उपयोग किया गया और एक ही व्यक्ति के नाम पर अलग-अलग कंपनियों में बीमा कराया गया। कुछ परिवारों में कुछ ही दिनों के अंतर पर दो से तीन सदस्यों को मृत दिखाकर क्लेम लिया गया, जिनमें लगभग सभी मामलों में मौत का कारण प्राकृतिक बताया गया ताकि संदेह न हो।
प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के तहत कम प्रीमियम और सरल प्रक्रिया का फायदा उठाकर इस बड़े फर्जीवाड़े को अंजाम दिया गया, जिसमें सालाना कम राशि में लाखों रुपये का बीमा कवर मिलता है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अपराध अनुसंधान विभाग ने दो अलग-अलग प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि यह नेटवर्क अन्य राज्यों तक फैला हो सकता है और कई बैंक व स्थानीय निकाय भी जांच के दायरे में हैं, जबकि कई संदिग्ध खातों को पहले ही फ्रीज किया जा चुका है।
यह पूरा मामला सरकारी योजनाओं में गंभीर सेंध का उदाहरण माना जा रहा है, जिसमें कागजों पर जिंदा लोगों को मृत दिखाकर करोड़ों की ठगी की गई, जो पूरे सिस्टम के लिए बड़ा चेतावनी संकेत है।





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