भोपाल, 30 अप्रैल।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेशों के प्रभावी पालन और पर्यावरण संरक्षण को मजबूत करने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश शासन ने भोपाल में एक नई “भोपाल पर्यावरण समिति” का गठन किया है। इस समिति का नेतृत्व भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा को सौंपा गया है।
गठित समिति में भोपाल कलेक्टर को अध्यक्ष बनाया गया है, वहीं नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन तथा नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी इसके सदस्य होंगे। इस समिति का प्रमुख दायित्व नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेशों की निगरानी करना और उनके जमीनी स्तर पर पालन की स्थिति की जांच करना होगा।
समिति विशेष रूप से भोपाल के बड़े तालाब और हरित क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करेगी। इन क्षेत्रों में हो रहे अतिक्रमण पर नजर रखी जाएगी और पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
इसके साथ ही अस्पतालों से निकलने वाले जैव-चिकित्सकीय अपशिष्ट, औद्योगिक इकाइयों के कचरे तथा गंदे पानी के अनियंत्रित निस्तारण जैसे मुद्दों पर भी सख्त निगरानी रखी जाएगी। बताया जा रहा है कि कई स्थानों पर वाटर हार्वेस्टिंग के नाम पर गंदा पानी जमीन में पहुंचाया जा रहा है, जिससे हैंडपंप और ट्यूबवेल के जल के दूषित होने का खतरा बढ़ गया है।
समिति यह भी सुनिश्चित करेगी कि सभी आदेशों का सही तरीके से पालन हो, अधीनस्थ अमला नियमित निरीक्षण करे और नियम तोड़ने वालों पर तुरंत कार्रवाई की जाए।
समिति के अध्यक्ष कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने कहा कि जिला प्रशासन इन आदेशों को लेकर पूरी तरह गंभीर है और समिति इनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध रहेगी।
इस कदम को भोपाल में जल स्रोतों की सुरक्षा, बढ़ते प्रदूषण और अतिक्रमण की समस्याओं के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे न केवल जल स्रोतों का संरक्षण होगा बल्कि प्रदूषण नियंत्रण और शहर के पर्यावरणीय संतुलन में भी सुधार की उम्मीद है।







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