अहमदाबाद, 17 अप्रैल
हर साल करीब 5.84 करोड़ लीटर पानी की बचत के अनुमान के साथ कांकड़िया डिपो को भारतीय रेलवे में जल प्रबंधन के एक आदर्श मॉडल के रूप में देखा जा रहा है। यह परियोजना हरित ढांचे की ओर बढ़ते कदमों का संकेत देती है और बताती है कि नवाचार के माध्यम से पारंपरिक व्यवस्थाओं में भी बदलाव लाया जा सकता है।
रेलवे संचालन को पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में अहमदाबाद स्थित कांकड़िया कोचिंग डिपो ने एक नई उपलब्धि हासिल की है। यह देश का पहला ‘वॉटर-न्यूट्रल’ रेलवे डिपो बन गया है, जहां अपशिष्ट जल के उपचार और पुनः उपयोग के जरिए बड़े स्तर पर पानी की बचत सुनिश्चित की जा रही है।
डिपो में अब रोजाना लगभग 1.60 लाख लीटर पानी की बचत हो रही है, जो 300 से अधिक घरेलू टंकियों के बराबर है। यह उपलब्धि कोचों की नियमित धुलाई और रखरखाव के दौरान निकलने वाले गंदे पानी को शुद्ध कर दोबारा इस्तेमाल में लाने से संभव हुई है। इस पहल ने रेलवे में ताजे पानी पर निर्भरता कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है।
इस बदलाव के केंद्र में फाइटोरिमेडिएशन तकनीक का उपयोग है, जो पौधों की मदद से अपशिष्ट जल को साफ करने का पर्यावरण हितैषी तरीका है। पहले जहां इस्तेमाल किया गया पानी सीधे बाहर छोड़ दिया जाता था, वहीं अब इसे वैज्ञानिक तरीके से तैयार बहु-स्तरीय प्रक्रिया से शुद्ध कर फिर से उपयोग में लाया जा रहा है।
इस प्रणाली में प्राकृतिक और आधुनिक दोनों तरह की शुद्धिकरण तकनीकों का समावेश किया गया है। सबसे पहले गंदे पानी को वेटलैंड आधारित प्रक्रिया से गुजारा जाता है, जहां पौधे अशुद्धियों को सोखकर पानी की गुणवत्ता सुधारते हैं। इसके बाद कार्बन और रेत फिल्टर से छानने के साथ-साथ पराबैंगनी किरणों द्वारा कीटाणु नाश किया जाता है, जिससे पानी दोबारा उपयोग के लिए सुरक्षित बनता है।
रेल मंत्रालय के अनुसार, यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण में सहायक है बल्कि पानी की खपत से जुड़े खर्चों में भी कमी लाती है। यह प्रणाली पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप है और यह दर्शाती है कि स्थिरता और नियमों का पालन साथ-साथ संभव है।
हर साल करीब 5.84 करोड़ लीटर पानी की बचत के अनुमान के साथ कांकड़िया डिपो को भारतीय रेलवे में जल प्रबंधन के एक आदर्श मॉडल के रूप में देखा जा रहा है। यह परियोजना हरित ढांचे की ओर बढ़ते कदमों का संकेत देती है और बताती है कि नवाचार के माध्यम से पारंपरिक व्यवस्थाओं में भी बदलाव लाया जा सकता है।






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