अनूपपुर, 13 अप्रैल।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि जीवनदायिनी नर्मदा नदी के संरक्षण के लिए शासन और समाज के बीच मजबूत समन्वय अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने निर्देश दिए कि नर्मदा के उद्गम स्थल के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएँ तथा नदी तटों पर हो रहे अतिक्रमण को निरंतर हटाया जाए।
वे सोमवार को अनूपपुर जिले के विश्व प्रसिद्ध तीर्थ एवं पर्यटन स्थल अमरकंटक में आयोजित नर्मदा समग्र मिशन की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अमरकंटक की पवित्रता और अखंडता बनाए रखने के लिए जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों तथा विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण के प्रतिनिधियों के माध्यम से व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाए।
बैठक में प्रदेश के वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री दिलीप अहिरवार, कुटीर एवं ग्रामोद्योग राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिलीप जायसवाल, नर्मदे हर सेवा न्यास के अध्यक्ष एवं मध्यप्रदेश कोल विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष रामलाल रौतेल, जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष मोहन नागर सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि अमरकंटक क्षेत्र में प्राकृतिक वनों के संरक्षण हेतु स्थानीय प्रजातियों और औषधीय पौधों का अधिक से अधिक रोपण किया जाए। वन मंडल अधिकारी से मिली जानकारी में बताया गया कि साल, महुआ, आँवला, चार, हर्रा, गुलबकावली जैसी स्थानीय प्रजातियों के पौधों का रोपण कर प्राकृतिक स्वरूप को सुदृढ़ किया जा रहा है, जिससे भूमिगत जल स्तर में सुधार और वनों का संरक्षण संभव हो सके।
वन विभाग की ओर से यह भी बताया गया कि अमरकंटक में पौधरोपण हेतु ढाई लाख से अधिक पौधे उपलब्ध हैं। मुख्यमंत्री ने क्षेत्र में नए कंक्रीट निर्माण पर सख्त रोक लगाने के निर्देश देते हुए अवैध निर्माण और अतिक्रमण पर नियमित कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।
बैठक में नर्मदा नदी में प्रदूषण, अपशिष्ट जल निकासी और जल प्रबंधन की स्थिति की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने जानकारी दी कि अमरकंटक में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया जा चुका है और यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि प्रदूषित जल नर्मदा में न मिले।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अमरकंटक धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थल है, जहाँ अनेक प्राचीन मंदिर स्थित हैं। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों को नीति और नियमों के अनुरूप नियंत्रित किया जाए तथा प्लास्टिक और शराब के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए।
उन्होंने अमरकंटक क्षेत्र में “नो मूवमेंट” और “नो कंस्ट्रक्शन” जोन निर्धारित करने के निर्देश भी दिए ताकि पर्यावरणीय संतुलन, पवित्रता और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा हो सके। कलेक्टर ने बताया कि ड्रोन सर्वे के माध्यम से अवैध निर्माण की पहचान कर समय-समय पर कार्रवाई की जा रही है।
बैठक में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने नर्मदा समग्र मिशन के तहत चल रहे कार्यों, घाटों की सफाई, जनसहभागिता से श्रमदान और विकास योजनाओं की जानकारी दी तथा नर्मदा नदी के समग्र विकास की कार्ययोजना पर भी प्रकाश डाला गया।








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