नई दिल्ली, 13 अप्रैल।
दिल्ली दंगों की कथित साजिश से जुड़े मामले में आरोपी उमर खालिद ने उच्चतम न्यायालय में अपनी जमानत याचिका खारिज किए जाने के आदेश पर पुनर्विचार की मांग करते हुए याचिका दायर की है। सोमवार को उनके पक्ष से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने न्यायमूर्ति अरविंद कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष इस मामले का उल्लेख किया और इसे खुले न्यायालय में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया। हालांकि, न्यायालय ने तत्काल कोई आदेश पारित नहीं किया, लेकिन मामले पर विचार करने का आश्वासन दिया।
इससे पहले 5 जनवरी को शीर्ष अदालत ने उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं। उस समय अदालत ने टिप्पणी की थी कि दोनों की भूमिका अन्य आरोपियों से भिन्न प्रतीत होती है और उन्हें कथित साजिश में प्रमुख भूमिका निभाने वाला माना गया था।
अदालत ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया था कि एक वर्ष के भीतर सभी गवाहों के बयान दर्ज किए जाएं, जिसके बाद दोनों आरोपियों को पुनः जमानत याचिका दाखिल करने की अनुमति होगी। अदालत ने कहा था कि यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा और अखंडता से जुड़ा है, इसलिए इसे साधारण आधार पर नहीं देखा जा सकता।
शीर्ष अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि अनुच्छेद 21 के तहत अधिकार महत्वपूर्ण हैं, लेकिन गंभीर आरोपों वाले मामलों में लंबे समय तक हिरासत को स्वतः आधार बनाकर राहत नहीं दी जा सकती। अदालत ने प्रत्येक आरोपी की भूमिका का अलग-अलग मूल्यांकन आवश्यक बताया था और कहा था कि ट्रायल से पहले की हिरासत को सजा के रूप में नहीं माना जा सकता।


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