देहरादून, 13 अप्रैल।
भारत के प्रधान न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत रविवार को देहरादून स्थित लेखक गांव पहुंचे, जहां उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि इस स्थान पर आकर वे अत्यंत अभिभूत हैं। उन्होंने कहा कि रचनात्मकता मानव जीवन का अनिवार्य हिस्सा है और इसे निरंतर विकसित किया जाना चाहिए।
लेखक गांव पहुंचने पर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस रमेश चंद्र शर्मा का स्वागत उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ तथा लेखक गांव की निदेशक डॉ. विदुषी निशंक ने किया। कार्यक्रम के प्रथम चरण में उन्होंने पद्म सम्मान प्राप्त विभूतियों, विश्वविद्यालयों के कुलपतियों और शिक्षाविदों के साथ संवाद किया। इस दौरान जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि लेखक गांव की स्थापना का उद्देश्य अत्यंत प्रेरणादायक है और यहां आकर उन्हें गहन रचनात्मक अनुभव प्राप्त हुआ।
उन्होंने नई पीढ़ी से अपील की कि वे अपनी संस्कृति, परंपरा, भाषा और साहित्य के संरक्षण में अपनी रचनात्मक क्षमता का उपयोग करें। इस अवसर पर पद्मश्री सम्मानित कई विभूतियों और शिक्षाविदों ने भी संवाद में भाग लिया।
कार्यक्रम के दूसरे चरण में जस्टिस सूर्यकांत ने विभिन्न विश्वविद्यालयों और कॉलेजों से आए विधि विद्यार्थियों से संवाद किया। उन्होंने कहा कि विधि का क्षेत्र धैर्य, समर्पण और निरंतर मेहनत की मांग करता है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि इस पेशे में सफलता धीरे-धीरे मिलती है, लेकिन एक बार स्थापित होने पर यह समाज को न्याय दिलाने का प्रभावी माध्यम बनता है।
उन्होंने यह भी कहा कि विद्यार्थियों को धन को प्राथमिक लक्ष्य नहीं बनाना चाहिए, बल्कि न्याय और सेवा को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने छात्रों से उनके करियर, तैयारी और चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की, जिस पर विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक अपनी जिज्ञासाएं साझा कीं।
इसके बाद जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस शर्मा ने लेखक गांव परिसर का भ्रमण किया और अटल पथ, राष्ट्रीय पार्क तथा नक्षत्र वाटिका जैसी व्यवस्थाओं की सराहना की। उन्होंने भविष्य में अधिक समय देकर युवाओं से संवाद करने की इच्छा भी व्यक्त की।
इस अवसर पर पूर्व शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने कहा कि प्रधान न्यायाधीश का लेखक गांव आगमन युवा रचनाकारों और विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने बताया कि यह स्थान वैश्विक स्तर पर रचनात्मकता का केंद्र बन रहा है और यहां 65 से अधिक देशों के लेखक तथा 50 से अधिक पद्म सम्मान प्राप्त व्यक्तित्व जुड़े हुए हैं।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. सुशील उपाध्याय ने किया, जबकि कई वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षाविद और अतिथि उपस्थित रहे।


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