काठमांडू, 13 अप्रैल
पतंजलि ट्रस्ट से जुड़े भूमि अनियमितता प्रकरण में बुधवार को उच्चतम न्यायालय में महत्वपूर्ण सुनवाई होने जा रही है। इस मामले में पूर्व प्रधानमंत्री एवं नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी के सह-संयोजक माधव कुमार नेपाल के विरुद्ध भ्रष्टाचार से संबंधित आरोप दर्ज किए गए हैं।
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की जांच में यह तथ्य सामने आया कि पतंजलि योगपीठ एवं आयुर्वेद विद्यालय के नाम पर आवंटित भूमि में गंभीर अनियमितताएँ हुईं। इसी आधार पर पूर्व प्रधानमंत्री नेपाल पर 18 करोड़ 58 लाख 50 हजार रुपये की क्षतिपूर्ति की मांग के साथ 5 जून 2025 को विशेष न्यायालय में भ्रष्टाचार का मामला दायर किया गया था।
जांच विवरण के अनुसार तत्कालीन प्रधानमंत्री के निर्देश पर संबंधित मंत्रालय ने भूमि कानून के तहत अतिरिक्त भूमि को जब्त कर सरकारी संपत्ति घोषित करने के बजाय उसे बिक्री और अदला-बदली की अनुमति देने का प्रस्ताव सीधे मंत्रिपरिषद में रखा था।
ब्यूरो के अनुसार मंत्रिपरिषद ने चलाल गणेशस्थान, सांगा और महेन्द्रज्योति क्षेत्र में खरीदी गई अतिरिक्त भूमि को बेचने और अदला-बदली की अनुमति देने का निर्णय लिया था। इसी निर्णय के आधार पर तत्कालीन मुख्य सचिव ने उसके क्रियान्वयन हेतु आधिकारिक पत्राचार किया। साथ ही यह भी सामने आया कि मंत्रिपरिषद और विधेयक समिति के निर्णय से पूर्व ही संबंधित अतिरिक्त भूमि को गिरवी रखकर बैंक से ऋण लिया जा चुका था।
प्रारंभ में दायर आरोपपत्र में कैबिनेट के नीतिगत निर्णय का उल्लेख करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री को अभियोजन से अलग रखने की बात कही गई थी। हालांकि बाद में उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया कि नीतिगत निर्णय से जुड़े मामलों में भी यदि भ्रष्टाचार के संकेत हों तो जांच संभव है और प्रधानमंत्री को भी जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।




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