खेती, पोषण और स्वास्थ्य को एक साझा मंच पर लाकर देश में बेहतर जीवनशैली और रोगों की रोकथाम को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सोमवार को “सेहत मिशन” की शुरुआत की गई। इस पहल को भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने मिलकर आरंभ किया है, जिसका मकसद कृषि क्षेत्र को पोषण, बीमारी की रोकथाम, किसान हित और वैज्ञानिक नीति निर्धारण से जोड़ना है।
राजधानी स्थित आईसीएआर परिसर में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा और कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। इस दौरान केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री भागीरथ चौधरी, आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल और आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एमएल जाट भी मौजूद रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य मंत्री नड्डा ने कहा कि सेहत मिशन देश की नीति प्रक्रिया में एक अहम बदलाव का संकेत है, जिसमें केवल उपचार तक सीमित रहने के बजाय रोकथाम, समय रहते पहचान और निरंतर देखभाल को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि भारत अब समस्याओं के बाद प्रतिक्रिया देने के बजाय पहले से तैयारी करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। लंबे समय तक कृषि और स्वास्थ्य से जुड़ी संस्थाएं अलग-अलग कार्य करती रहीं, लेकिन अब दोनों संस्थानों का साथ आना विज्ञान आधारित समाधान तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि यह पहल एक ओर कुपोषण और दूसरी ओर तेजी से बढ़ रही गैर-संचारी बीमारियों जैसे मधुमेह, उच्च रक्तचाप और कैंसर जैसी चुनौतियों से निपटने में उपयोगी साबित होगी। उनके अनुसार भारत को अपने अनुभव, अनुसंधान और वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर स्वदेशी उपाय विकसित करने होंगे। कम लागत वाले, बेहतर गुणवत्ता के और वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित समाधान देश के लिए सबसे अधिक उपयोगी रहेंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि आईसीएमआर इस दिशा में पूरी जिम्मेदारी के साथ कार्य करेगा और यह मिशन स्वस्थ एवं मजबूत भारत की आधारशिला बनेगा।
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सेहत मिशन का आरंभ देश के लिए ऐतिहासिक पहल है, जो खेती, पोषण और स्वास्थ्य को एक सूत्र में जोड़ते हुए स्वस्थ भारत के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करेगा। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में स्वस्थ शरीर को सबसे बड़ा सुख माना गया है और उत्तम स्वास्थ्य का आधार संतुलित भोजन है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अब देश को केवल अधिक उपज की नहीं, बल्कि ऐसे उत्पादन की आवश्यकता है जो पोषण प्रदान करे, रोगों से सुरक्षा दे और लोगों को बेहतर जीवन की दिशा में आगे बढ़ाए।
उन्होंने कहा कि अब केवल “क्या खाएं” पर नहीं, बल्कि “क्या उगाएं” को लेकर भी राष्ट्रीय स्तर पर गंभीर विचार की आवश्यकता है। उनके अनुसार सेहत मिशन खेती से भोजन और भोजन से स्वास्थ्य तक एक वैज्ञानिक व्यवस्था तैयार करेगा। यह पहल बायो-फोर्टिफाइड फसलों, पोषणयुक्त खाद्य पदार्थों, एकीकृत कृषि प्रणाली, किसानों की स्वास्थ्य सुरक्षा, जीवनशैली संबंधी बीमारियों के अनुरूप आहार और “वन हेल्थ” दृष्टिकोण पर आधारित होगी।
चौहान ने कहा कि देश में खाद्यान्न उत्पादन पर्याप्त मात्रा में हो रहा है, लेकिन अब आगे की प्राथमिकता पोषण से भरपूर उत्पादन पर होनी चाहिए। उन्होंने जिंक, आयरन और अन्य पोषक तत्वों से समृद्ध फसलों के साथ कोदो, कुटकी, ज्वार, रागी और बाजरा जैसे पारंपरिक अनाजों को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई।
उन्होंने कहा कि एकीकृत खेती केवल किसानों की आमदनी बढ़ाने का जरिया नहीं है, बल्कि यह परिवारों के पोषण को भी मजबूत करती है। अनाज उत्पादन के साथ फल, सब्जियां, पशुपालन, मत्स्य पालन और मधुमक्खी पालन जैसी गतिविधियां ग्रामीण परिवारों को संतुलित आहार और बेहतर स्वास्थ्य उपलब्ध कराने में मददगार बन सकती हैं।



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