लखनऊ, 27 अप्रैल।
पुस्तकों के अध्ययन की घटती प्रवृत्ति पर चिंता जताते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह क्षेत्र प्रचार प्रमुख ने विद्यार्थियों से गुणवत्तापूर्ण साहित्य पढ़ने और उसके विचारों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
राष्ट्रधर्म कार्यालय, राजेंद्र नगर में आयोजित साप्ताहिक साहित्यिक संवाद ‘पुस्तक चर्चा’ में उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को ऐसी पुस्तकों के अध्ययन पर ध्यान देना चाहिए जो व्यापक रूप से पढ़ी और समझी जाती हों तथा जिनमें प्रस्तुत विचारों का वैश्विक, राष्ट्रीय और स्थानीय स्तर पर विश्लेषण किया जा सके।
कार्यक्रम में लखनऊ विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर ने विचारक और लेखक की पुस्तक ‘हम और यह विश्व’ पर अपने विचार व्यक्त किए और बताया कि यह कृति भारत की उस गहन वैचारिक परंपरा का विश्लेषण प्रस्तुत करती है, जिसे प्राचीन ऋषियों ने स्थापित किया और जिसे समय के साथ आगे बढ़ाया गया।
उन्होंने कहा कि इस पुस्तक में धर्म, स्वत्व, हिंदुत्व और सनातन जैसे विषयों को सरल ढंग से प्रस्तुत किया गया है और इसमें भारतीय दर्शन तथा विचारधारा को स्पष्ट रूप से समझाया गया है। यह पुस्तक विभिन्न वर्षों में लिखे गए लेखों का संग्रह है, जिसे प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित किया गया था।
कार्यक्रम में बताया गया कि पुस्तक को चार भागों में विभाजित किया गया है, जिनमें संघ और समाज, भारत की आत्मा, असहिष्णुता का सच और प्रेरणा शाश्वत है शामिल हैं। चर्चा की शुरुआत में विषय का सार प्रस्तुत किया गया और अंत में आभार व्यक्त किया गया। कार्यक्रम में कई साहित्यकार और विद्वान उपस्थित रहे।




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