नई दिल्ली, 14 मई।
भारत और रूस के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूती देने की दिशा में गुरुवार को अहम मुलाकात हुई। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नई दिल्ली में भेंट कर द्विपक्षीय सहयोग की प्रगति के साथ कई क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की। इस दौरान यूक्रेन संकट और पश्चिम एशिया की स्थिति प्रमुख विषय रहे।
प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, सर्गेई लावरोव ने दिसंबर 2025 में आयोजित 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के बाद दोनों देशों के बीच विभिन्न क्षेत्रों में हुई प्रगति से प्रधानमंत्री मोदी को अवगत कराया। दोनों देशों के बीच सहयोग के विस्तार और रणनीतिक संबंधों को लेकर विस्तृत बातचीत हुई।
बैठक के दौरान रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष, तकनीक और व्यापार जैसे क्षेत्रों में बढ़ते सहयोग पर चर्चा की गई। लावरोव ने बताया कि हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच संवाद और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूती मिली है। साथ ही मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और साझा हितों से जुड़े विषयों पर भी विचार-विमर्श किया गया।
यूक्रेन संघर्ष और पश्चिम एशिया के हालात को लेकर दोनों पक्षों ने विस्तार से चर्चा की। प्रधानमंत्री मोदी ने एक बार फिर भारत की नीति स्पष्ट करते हुए कहा कि किसी भी विवाद का समाधान संवाद और कूटनीति के रास्ते से ही संभव है। उन्होंने वैश्विक शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए सहयोग की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत हमेशा शांतिपूर्ण समाधान के पक्ष में खड़ा रहा है और क्षेत्रीय व वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए संतुलित दृष्टिकोण अपनाने को प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी दोहराया कि यूक्रेन और रूस के बीच जारी संघर्ष को समाप्त करने के लिए संवाद सबसे प्रभावी माध्यम है।
मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को अपनी ओर से शुभकामनाएं पहुंचाने का अनुरोध भी किया। दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि भारत और रूस के बीच लंबे समय से चले आ रहे संबंधों को और मजबूत बनाने के लिए सहयोग और संवाद को निरंतर आगे बढ़ाना जरूरी है।
यह बैठक भारत-रूस संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। साथ ही सामरिक और आर्थिक साझेदारी को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने का संदेश भी इस मुलाकात के जरिए सामने आया है।








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