कोलकाता, 14 मई।
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी गुरुवार को कलकत्ता उच्च न्यायालय पहुंचीं और 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद हुई हिंसा से जुड़े मामले में अदालत के समक्ष स्वयं पक्ष रखते हुए दलीलें पेश कीं, जहां वह वकील की पोशाक में अदालत परिसर में उपस्थित रहीं।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सुजय पाल की खंडपीठ में उन्होंने कहा कि वह पहली बार उच्च न्यायालय में बहस कर रही हैं और उन्होंने बताया कि वर्ष 1985 में उनका नाम बार काउंसिल में पंजीकृत हुआ था तथा तब से वह लगातार अपनी सदस्यता का नवीनीकरण कराती आ रही हैं।
अदालत में ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि चुनाव के बाद राज्य में महिलाओं, बच्चों और अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की घटनाएं सामने आ रही हैं, साथ ही उन्होंने कहा कि विवाहित महिलाओं को दुष्कर्म की धमकियां दी जा रही हैं, घरों में लूटपाट और आगजनी हो रही है तथा पुलिस प्रभावी कार्रवाई करने में असमर्थ दिख रही है।
उन्होंने अदालत से यह भी अनुरोध किया कि यदि अनुमति दी जाए तो इन शिकायतों को अतिरिक्त हलफनामे के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है और राज्य के नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, साथ ही उन्होंने कहा कि यह कोई बुलडोजर राज्य नहीं है बल्कि पश्चिम बंगाल है, इसलिए लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
वहीं राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता धीराज त्रिवेदी ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा कि याचिका में घटनाओं का स्पष्ट स्थान और विवरण नहीं दिया गया है तथा पुलिस अपनी भूमिका निभा रही है और दो हजार से अधिक शिकायतों के समर्थन में कोई ठोस आधार नहीं है।
राज्य सरकार ने यह भी दलील दी कि वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव बाद हिंसा की जांच के लिए पहले से ही पांच न्यायाधीशों की बड़ी पीठ गठित की जा चुकी है, इसलिए पहले यह तय होना चाहिए कि वर्तमान घटनाएं वास्तव में उसी श्रेणी में आती हैं या नहीं, उसके बाद ही किसी अंतरिम आदेश पर विचार किया जाए।
यह जनहित याचिका तृणमूल कांग्रेस सांसद कल्याण बनर्जी के पुत्र और अधिवक्ता शीर्षान्य बनर्जी द्वारा दायर की गई है और मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सुजय पाल तथा न्यायमूर्ति पार्थ सारथी सेन की पीठ में हुई।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी ममता बनर्जी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़े मामले में उच्चतम न्यायालय पहुंची थीं, जहां उन्होंने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ के समक्ष अपनी दलीलें रखी थीं।
विधानसभा चुनाव परिणामों में भारतीय जनता पार्टी को 207 सीटें, तृणमूल कांग्रेस को 80 सीटें, कांग्रेस को दो, माकपा को एक, आईएसएफ को एक और एजेयूपी को दो सीटें प्राप्त हुई थीं, जबकि एक सीट पर पुनर्मतदान के कारण परिणाम लंबित रहा।
इसी बीच तृणमूल कांग्रेस ने उच्च न्यायालय परिसर के बाहर का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करते हुए कहा कि ममता बनर्जी हमेशा पश्चिम बंगाल के लोगों के साथ खड़ी हैं और सत्य, न्याय तथा संवैधानिक मूल्यों के लिए संघर्ष जारी रखेंगी।








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