भोपाल, 05 मई।
मध्यप्रदेश में श्रम और उद्योग व्यवस्था को सरल, पारदर्शी और डिजिटल बनाने की दिशा में सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। ‘एमपी कोड ऑन एम्पावरिंग वर्क स्पेसेस 2026’ के तहत दशकों पुराने पांच श्रम कानूनों को समाप्त कर एकीकृत कानून लागू करने की तैयारी अंतिम चरण में पहुंच गई है।
सरकार द्वारा तैयार किए गए इस नए प्रारूप पर विशेषज्ञों से सुझाव लिए जा रहे हैं। प्रस्तावित व्यवस्था लागू होने के बाद सभी श्रम प्रक्रियाएं एक ही डिजिटल मंच पर संचालित होंगी, जिससे नियोक्ता और कर्मचारियों को सुविधा मिलेगी और कागजी प्रक्रियाओं में लगने वाला समय कम होगा।
नई व्यवस्था में संस्थानों को केवल एक बार पंजीयन कराना होगा, जो आजीवन मान्य रहेगा। प्रत्येक इकाई को एक विशिष्ट पहचान संख्या दी जाएगी, जिससे निगरानी और ट्रैकिंग को आसान बनाया जा सकेगा। साथ ही सामान्य त्रुटियों या छोटी गलतियों पर अब जेल का प्रावधान नहीं होगा, बल्कि जुर्माना लगाया जाएगा। हालांकि सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर सख्त दंड और भारी जुर्माने का प्रावधान रखा गया है।
इस कोड की प्रमुख विशेषता यह है कि गिग वर्कर्स को पहली बार कानूनी सुरक्षा के दायरे में शामिल किया जा रहा है। विभिन्न सेवा आधारित कंपनियों से जुड़े कर्मियों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिलेगा और कंपनियों के लिए नियमों का विवरण पोर्टल पर दर्ज करना अनिवार्य होगा।
महिला कर्मचारियों को सुरक्षित वातावरण और परिवहन सुविधा के साथ रात्रिकालीन पाली में कार्य करने की अनुमति दी जाएगी। इसके अलावा कर्मचारियों के मूल दस्तावेज अपने पास रखना अपराध माना जाएगा।
निरीक्षण प्रणाली को भी डिजिटल और रैंडम बनाया जाएगा, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके। वहीं दूसरे जिलों में कार्यरत श्रमिकों के लिए विस्थापन भत्ता और यात्रा खर्च की व्यवस्था भी प्रस्तावित की गई है।








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