असम
18 Apr, 2026

नांगल बिहू पर असम में कृषि उपकरणों की पारंपरिक पूजा, किसानों ने समृद्ध फसल की कामना की

असम में रंगाली बिहू के दौरान नांगल बिहू पर किसानों ने कृषि उपकरणों की पूजा कर अच्छी फसल और समृद्धि की कामना की, पारंपरिक परंपरा आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में जीवित है।

गुवाहाटी, 18 अप्रैल।

आज रंगाली बिहू के पांचवें दिन पूरे असम में नांगल (हल) बिहू पारंपरिक आस्था और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। बहाग माह के पांचवें दिन और ‘सात बिहू’ के पांचवें चरण के रूप में मनाए जाने वाले इस पर्व का कृषि जीवन में विशेष महत्व है, जिसे मुख्यतः कृषक समुदाय द्वारा उत्साहपूर्वक मनाया जाता है।

इस अवसर पर किसानों ने सुबह अपने कृषि उपकरणों जैसे हल, जुआल तथा अन्य औजारों की साफ-सफाई कर उन्हें व्यवस्थित किया और दीपक व धूप जलाकर विधिवत पूजा-अर्चना की। यह परंपरा आने वाले कृषि मौसम में अच्छी पैदावार और समृद्धि की कामना का प्रतीक मानी जाती है।

असम के ग्रामीण और कृषि समाज में नांगल बिहू का विशेष स्थान है। बहाग बिहू के उत्सवपूर्ण माहौल के बाद यह दिन खेतों में काम शुरू करने की तैयारी का संकेत देता है। राज्य के विभिन्न ग्रामीण इलाकों में किसानों ने पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ इस परंपरा का पालन करते हुए बेहतर फसल और खुशहाली की प्रार्थना की।

हालांकि समय के साथ खेती के तौर-तरीकों में बदलाव आया है और आधुनिक तकनीक का प्रभाव बढ़ा है। ट्रैक्टर सहित अन्य मशीनों के बढ़ते उपयोग के कारण पारंपरिक कृषि उपकरणों की भूमिका पहले की तुलना में कुछ कम हुई है, फिर भी राज्य के कई हिस्सों में आज भी नांगल बिहू की परंपरा पूरी निष्ठा से निभाई जा रही है।

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