अनूपपुर, 03 अप्रैल 2026।
मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले के पवित्र स्थल अमरकंटक में शुक्रवार को नर्मदा परिक्रमा का एक अनोखा दृश्य देखने को मिला, जहां महाराष्ट्र के पुणे निवासी 40 वर्षीय प्रीतपाल सिर पर लकड़ी से बने मंदिर को धारण कर कठिन पदयात्रा करते हुए यहां पहुंचे। उन्होंने ओंकारेश्वर से अपनी यात्रा आरंभ की थी और मां नर्मदा की भक्ति में लीन होकर लगातार आगे बढ़ते हुए अमरकंटक तक पहुंचे हैं।
प्रीतपाल इस विशेष मंदिर में त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु और महेश के साथ मां नर्मदा की प्रतिमा स्थापित कर यात्रा कर रहे हैं। दैनिक उपयोग की वस्तुएं वे अपने साथ बैग में रखते हैं और कठोर साधना व हठयोग के साथ इस परिक्रमा को पूरा कर रहे हैं। लगभग चार महीने की कठिन यात्रा के बाद वे अमरकंटक स्थित माई की बगिया पहुंचे, जहां उन्होंने विधि-विधान से पूजन, आरती और तट-जल परिवर्तन की प्रक्रिया संपन्न की। इसके बाद उन्होंने दक्षिण तट से अपनी यात्रा को पुनः आगे बढ़ा दिया।
एक हाथ में दंड और कमंडल लिए प्रीतपाल मुस्कुराते हुए भजन-कीर्तन करते हुए अपनी यात्रा जारी रखे हुए हैं। उनकी अटूट श्रद्धा, ऊर्जा और समर्पण मार्ग में मिलने वाले लोगों के लिए प्रेरणा बन रहा है।
उन्होंने बताया कि वे प्रतिदिन लगभग 25 से 30 किलोमीटर की दूरी तय करते हैं। यात्रा के दौरान वे खंभात की खाड़ी को भी पार कर चुके हैं और अनुमान है कि परिक्रमा पूरी करने में अभी करीब तीन महीने और लगेंगे। उन्होंने कहा कि मां नर्मदा की कृपा से यात्रा के दौरान किसी प्रकार की कमी महसूस नहीं होती और हर दिन सुबह-शाम पूजा-अर्चना की जाती है। उनके अनुसार, मां नर्मदा कभी भी उन्हें भूखा नहीं रहने देतीं और किसी न किसी रूप में सहायता मिल जाती है। उन्होंने यह भी बताया कि इस यात्रा की प्रेरणा उन्हें अपने गांव के लोगों से मिली और यह उनके माता-पिता व पूर्वजों का आशीर्वाद है कि वे इस कठिन साधना को निभा पा रहे हैं।












