नई दिल्ली, 21 मार्च 2026।
भारत में पारिस्थितिकी और कृषि पर गंभीर खतरा बन चुकी 'आक्रामक विदेशी प्रजातियों' से निपटने के लिए राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (एनबीए) ने एक उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। यह कदम राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के निर्देश और पर्यावरण मंत्रालय की सलाह के बाद उठाया गया।
पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अनुसार एनजीटी की ओर से (मूल आवेदन संख्या 162/2023) स्वतः संज्ञान लेने के बाद यह निर्णय लिया गया। अधिकरण ने चिंता जताई थी कि विदेशी प्रजातियां देशी जैव विविधता को नुकसान पहुंचा रही हैं और खाद्य सुरक्षा, कृषि तथा मानव स्वास्थ्य के लिए भी खतरा पैदा कर रही हैं। एनबीए को व्यापक अध्ययन और रणनीतिक योजना तैयार करने का निर्देश दिया गया।
समिति की अध्यक्षता आईएफएस (सेवानिवृत्त), पूर्व पीसीसीएफ और उत्तराखंड के वन बल प्रमुख धनंजय मोहन कर रहे हैं, जबकि केरल मत्स्य एवं महासागर अध्ययन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर ए. बीजू कुमार सह-अध्यक्ष हैं। समिति में प्रमुख मंत्रालयों और वैज्ञानिक संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी तथा विशेषज्ञ शामिल हैं।
एनबीए ने 'जैविक विविधता अधिनियम, 2002' के तहत समिति को राष्ट्रीय सूची तैयार करने, जोखिम मूल्यांकन, प्रबंधन रणनीतियों और अनुसंधान तथा डेटा संग्रह जैसी जिम्मेदारियां सौंपी हैं। आक्रामक विदेशी प्रजातियां जैसे लैंटाना और जलकुंभी तेजी से भारतीय जंगलों और जल निकायों पर हावी हो रही हैं। समिति का दो वर्षीय कार्यकाल देश की पारिस्थितिकी तंत्र सुरक्षा और वैश्विक जैव विविधता प्रतिबद्धताओं के लिए मील का पत्थर साबित होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समग्र सरकारी दृष्टिकोण न केवल पर्यावरण की रक्षा करेगा, बल्कि किसानों की आय और ग्रामीण आजीविका को भी सुरक्षित बनाएगा।












