जबलपुर, 16 मई।
भारत की न्याय व्यवस्था को अब 24 घंटे सक्रिय रहने वाली प्रणाली की दिशा में आगे बढ़ाने की आवश्यकता है, जिससे तकनीक के माध्यम से आम नागरिकों तक न्याय अधिक तेज और सुलभ तरीके से पहुंच सके, यह बात सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने जबलपुर में आयोजित एक राष्ट्रीय सेमिनार में कही।
उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में न्याय प्रणाली को ऐसे प्लेटफॉर्म विकसित करने होंगे, जिन्हें ग्रामीण और तकनीक से कम परिचित लोग भी आसानी से समझ और उपयोग कर सकें, इसके लिए स्थानीय स्तर पर पैरालीगल स्वयंसेवकों की भूमिका अहम होगी जो लोगों को डिजिटल न्याय व्यवस्था से जोड़ सकें।
यह कार्यक्रम ‘फ्रैगमेंटेशन ऑफ फ्यूजन एम्पावरिंग जस्टिस वाया यूनाइटेड डिजिटल प्लेटफॉर्म इंटीग्रेशन’ विषय पर आयोजित किया गया, जिसमें सर्वोच्च एवं उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के साथ केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी उपस्थित रहे।
सेमिनार से पूर्व नेताजी सुभाषचंद्र बोस सांस्कृतिक एवं सूचना केंद्र में इस डिजिटल न्याय प्रणाली से जुड़े प्लेटफॉर्म का शुभारंभ किया गया और वार्षिक रिपोर्ट 2025 का भी विमोचन किया गया।
मुख्य न्यायाधीश ने नर्मदा नदी का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे छोटी धारा आगे चलकर विशाल रूप लेती है, वैसे ही न्याय प्रणाली में किए जा रहे छोटे तकनीकी सुधार भविष्य में बड़े परिवर्तन का आधार बनेंगे और डिजिटल प्लेटफॉर्म न्याय व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाएंगे।
उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश में पुलिस थाने, फॉरेंसिक लैब, मेडिकल सिस्टम, लीगल सेल, न्यायालय और जेल से जुड़ी सूचनाओं को एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की पहल की गई है, जिसे देशभर में लागू करने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि न्यायिक व्यवस्था में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग के लिए विशेष समिति गठित की गई है, जो लंबित मामलों के त्वरित समाधान और प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने पर कार्य कर रही है।
उन्होंने कहा कि कोविड काल में भी भारत की न्यायपालिका ने डिजिटल माध्यम से कामकाज जारी रखकर यह साबित किया कि तकनीक के साथ न्याय व्यवस्था मजबूत बनी रह सकती है और इसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना हुई है।
मुख्य न्यायाधीश ने एक पुराने मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि डिजिटल प्रणाली लागू होने से अब ऐसे हालात से बचा जा सकेगा, जब न्यायिक आदेश समय पर संबंधित स्थान तक नहीं पहुंच पाते थे।
केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने मध्य प्रदेश की पहल को सराहते हुए कहा कि यह मॉडल देश के लिए मिसाल बनेगा और साइन लैंग्वेज आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसी पहल समावेशी न्याय व्यवस्था की दिशा में बड़ा कदम है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि न्याय परंपरा का उल्लेख बिना सम्राट विक्रमादित्य के अधूरा है और विक्रम-बेताल की कथाएं न्याय, नीति और प्रशासन के गहरे संदेश देती हैं, वहीं तकनीकी नवाचार न्याय प्रणाली को और अधिक सशक्त बनाएंगे।
सेमिनार में ई-कोर्ट सिस्टम, डेटा इंटीग्रेशन और यूनिफाइड डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई, जिसे देश की भावी डिजिटल न्याय व्यवस्था की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है।
कार्यक्रम के अंत में सांस्कृतिक प्रस्तुति देने वाले बच्चों को सम्मानित किया गया और मुख्य न्यायाधीश ने एक बच्ची को गोद में लेकर स्नेह व्यक्त किया, जिस पर पूरा सभागार तालियों से गूंज उठा।










