न्यायपालिका
16 May, 2026

स्थायी सेवा अवधि को भी सेवा में जोड़ा जाएगा, हाईकोर्ट ने नर्सिंग ऑफिसर को दी बड़ी राहत

राजस्थान उच्च न्यायालय ने नर्सिंग ऑफिसर नीतू चौधरी के मामले में अस्थायी सेवा अवधि को अर्हक सेवा मानते हुए वरिष्ठता, पदोन्नति और सभी परिलाभ देने का आदेश पारित किया।

जोधपुर, 16 मई।

राजस्थान उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में नियमित चयन से पहले की अस्थायी एवं संविदा सेवाओं की अवधि को सभी प्रयोजनार्थ सेवा मानते हुए बड़ा राहतकारी आदेश पारित किया है, जिससे याचिकाकर्ता नीतू चौधरी को लंबे समय बाद न्याय प्राप्त हुआ है।

न्यायालय के अनुसार याचिकाकर्ता की अस्थायी सेवा अवधि को सेवा गणना में सम्मिलित किए जाने का निर्देश दिया गया है। यह आदेश वरिष्ठ न्यायाधीश कुलदीप माथुर की एकलपीठ द्वारा पारित किया गया, जिसमें संबंधित सेवा अवधि को मान्यता देने पर बल दिया गया।

नीतू चौधरी, जो जोधपुर निवासी नर्सिंग ऑफिसर हैं, की ओर से अधिवक्ता यशपाल खिलेरि ने वर्ष 2004 में याचिका प्रस्तुत करते हुए बताया था कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा रोजगार कार्यालय के माध्यम से विज्ञप्ति जारी कर चयन प्रक्रिया के तहत मेरिट एवं रोस्टर के आधार पर उनका प्रारंभिक चयन 25 जनवरी 2000 को नर्स ग्रेड द्वितीय के रिक्त पद पर किया गया था।

याचिका में यह भी कहा गया कि चयन के बाद महात्मा गांधी अस्पताल, जोधपुर में कार्यभार ग्रहण करने के पश्चात विभाग ने संविदा आधार पर नियुक्तियां प्रारंभ कर दी थीं। इसके बाद 26 अक्टूबर 2004 के आदेश तथा 11 नवंबर 2004 की विज्ञप्ति के माध्यम से रिटायर्ड कार्मिकों की नियुक्ति को चुनौती देते हुए नियमितीकरण, समान कार्य के लिए समान वेतन और अन्य लाभों की मांग की गई थी।

मामले की प्रारंभिक सुनवाई के बाद अंतरिम आदेश भी पारित किए गए थे, जिसमें विवादित नियुक्तियों को याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन रखा गया था।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने स्वयं न्यायालय में उपस्थित होकर कहा कि कार्यदिवस के विरोध में वकीलों के स्वैच्छिक बहिष्कार के कारण उन्हें स्वयं पक्ष रखना पड़ा और उन्होंने 26 जनवरी 2000 से सेवा निरंतरता, वरिष्ठता, पदोन्नति सहित सभी लाभों की गणना की मांग की।

याचिकाकर्ता ने यह भी तर्क दिया कि चिकित्सा अधीनस्थ सेवा नियमों सहित अन्य सेवा नियमों में अस्थायी सेवा को अर्हक सेवा माना गया है तथा सर्वोच्च न्यायालय के हालिया निर्णयों में भी लगातार सेवा को नियमितीकरण के आधार के रूप में स्वीकार किया गया है।

अंततः एकलपीठ ने याचिका स्वीकार करते हुए आदेश दिया कि याचिकाकर्ता की प्रारंभिक नियुक्ति 26 जनवरी 2000 से लेकर वर्तमान तक की सेवा अवधि को अर्हक सेवा में शामिल किया जाए तथा उसी आधार पर वरिष्ठता, पदोन्नति, वेतनमान, वेतनवृद्धि और अन्य सभी परिलाभ प्रदान किए जाएं।

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