भोपाल, 09 मई।
प्रदेश में निगम, मंडल और प्राधिकरणों में राजनीतिक नियुक्तियों की प्रक्रिया के बीच सिंगरौली विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष पद को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए कथित नियुक्ति आदेश के आधार पर भाजपा नेता वीरेंद्र गोयल को प्राधिकरण का अध्यक्ष मान लिया गया। इस दौरान छह दिनों तक समर्थकों और कई नेताओं ने उन्हें बधाइयां दीं तथा मिठाई खिलाकर खुशी जाहिर की।
बाद में हुई जांच में सामने आया कि जिस आदेश को आधार बनाकर यह पूरा मामला चला, वह फर्जी निकला। दस्तावेज में कई तरह की त्रुटियां पाई गईं। इतना ही नहीं, जिस अधिकारी के हस्ताक्षर आदेश में दर्शाए गए थे, उस नाम का कोई अधिकारी संबंधित विभाग में पदस्थ ही नहीं है।
बताया गया कि राज्य सरकार ने बीते वर्ष कई निगम, मंडलों और प्राधिकरणों में पदाधिकारियों को हटाया था, लेकिन सिंगरौली विकास प्राधिकरण का नाम उस सूची में शामिल नहीं था। इसी वजह से प्रशासनिक स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी और अध्यक्ष पद को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया।
उधर, नगरीय प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे ने स्पष्ट किया कि उनके विभाग की ओर से सिंगरौली विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष पद के संबंध में कोई आदेश जारी नहीं किया गया है। विभाग अब पुराने बोर्ड की स्थिति स्पष्ट करने और वैधानिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही नई नियुक्ति पर फैसला करेगा।











