कोलकाता, 09 मई।
करीब पचपन वर्ष से अधिक समय बाद पश्चिम बंगाल की सत्ता एक बार फिर पूर्व मेदिनीपुर जिले से जुड़े एक नेता के हाथ में आई है। भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी को मुख्यमंत्री घोषित किए जाने के बाद राजनीतिक हलकों में इस बदलाव की ऐतिहासिक तुलना शुरू हो गई है।
लगभग उनसठ वर्ष पहले भी पूर्व मेदिनीपुर के ही नेता अजय कुमार मुखर्जी ने तामलुक और आरामबाग दोनों विधानसभा सीटों से चुनाव जीतकर राज्य की सत्ता संभाली थी। उन्होंने उस समय तामलुक में भाकपा प्रत्याशी और आरामबाग में तत्कालीन मुख्यमंत्री को पराजित किया था।
वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में शुभेंदु अधिकारी ने भी भवानीपुर और नंदीग्राम दोनों सीटों से जीत दर्ज की है। भवानीपुर में उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री को हराया, जिससे यह तुलना और अधिक चर्चा में आ गई है।
ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार अजय कुमार मुखर्जी पहले बिधान चंद्र राय की मंत्रिपरिषद में कई बार मंत्री रह चुके थे। बाद में उन्होंने कांग्रेस से अलग होकर बंगला कांग्रेस का गठन किया और संयुक्त मोर्चा सरकार में मुख्यमंत्री बने, हालांकि उनका कार्यकाल सीमित रहा।
राजनीतिक संघर्ष और पृष्ठभूमि की दृष्टि से दोनों नेताओं के बीच कई समानताएं बताई जा रही हैं। शुभेंदु अधिकारी ने वर्ष 2020 में तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामा और उसके बाद नंदीग्राम से बड़ी जीत हासिल की।
पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने राज्य भर में पार्टी संगठन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसके बाद उन्हें मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है।










