नई दिल्ली, 14 अप्रैल
भारत के संविधान निर्माता और भारत रत्न डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर की 135वीं जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित देश के शीर्ष नेतृत्व ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके राष्ट्र निर्माण और सामाजिक न्याय के योगदान को स्मरण किया, जो आज भी आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर अपने संदेश में कहा कि डॉ. अंबेडकर को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि देते हुए उनके राष्ट्र निर्माण के प्रयास अत्यंत प्रेरणादायक हैं और उनका जीवन तथा कार्य एक न्यायपूर्ण और प्रगतिशील समाज के निर्माण के लिए निरंतर प्रेरित करते हैं।
डॉ. भीमराव अंबेडकर, जिन्हें बाबासाहेब के नाम से भी जाना जाता है, स्वतंत्र भारत के पहले कानून एवं न्याय मंत्री रहे और उन्हें भारतीय संविधान का प्रमुख शिल्पकार माना जाता है। उनका जीवन सामाजिक समानता और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए संघर्ष का प्रतीक रहा है।
इसी क्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। अमित शाह ने कहा कि डॉ. अंबेडकर ने सभी वर्गों को समान अधिकार और अवसर देने वाले संविधान की नींव रखकर भारत के लोकतंत्र को मजबूत किया, और उनका जीवन राष्ट्रीय सेवा तथा जनकल्याण के प्रति समर्पण की प्रेरणा देता है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उन्हें दूरदर्शी नेता बताते हुए कहा कि उन्होंने समाज में समानता और सौहार्द स्थापित करने के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित किया। उन्होंने यह भी कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद डॉ. अंबेडकर ने उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कीं और देश की संस्थाओं के विकास में अहम भूमिका निभाई।
प्रधानमंत्री और दोनों मंत्रियों से पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी थी और उनके राष्ट्र निर्माण, सामाजिक सुधार और संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करने में योगदान को याद किया।
डॉ. अंबेडकर का जन्म एक सामाजिक रूप से पिछड़े परिवार में हुआ था और उन्होंने जीवनभर वंचित और पिछड़े वर्गों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया। वे सामाजिक समानता और परिवर्तन के प्रतीक के रूप में व्यापक रूप से सम्मानित हैं। उन्हें वर्ष 1990 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।
इसी बीच, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी अंबेडकर जयंती पर उन्हें नमन करते हुए सामाजिक न्याय और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि बाबासाहेब ने समान अधिकार और शिक्षा पर विशेष जोर देकर महिला सशक्तिकरण और न्यायपूर्ण समाज की नींव को मजबूत किया।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि वंचित, पीड़ित और पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए उनका संघर्ष आज भी नई पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। इस अवसर पर इंदौर के पास स्थित उनके जन्मस्थान महू में भव्य आयोजन किया गया, जहां बड़ी संख्या में लोग श्रद्धा और उत्साह के साथ शामिल हुए। मुख्यमंत्री सहित कई गणमान्य व्यक्तियों के कार्यक्रम में शामिल होने की भी संभावना जताई गई।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार आयोजन स्थल पर भीड़ प्रबंधन के लिए व्यापक व्यवस्था की गई है। पूरे परिसर को सात सेक्टरों में विभाजित किया गया है और विभिन्न विभागों के अधिकारी तैनात किए गए हैं। साथ ही तीन नियंत्रण कक्ष स्थापित किए गए हैं।
महू में छह स्थानों पर आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं की व्यवस्था की गई है और चिकित्सकों की टीमें तैनात हैं। स्थानीय निकायों द्वारा स्वच्छता व्यवस्था सुनिश्चित की गई है, जबकि अग्निशमन व्यवस्था भी सक्रिय रूप से तैयार रखी गई है।









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