देहरादून, 02 मई।
टिहरी गढ़वाल के जौनपुर ब्लॉक के देवन गांव की पूजा कंडारी की कहानी इस बात का जीवंत उदाहरण है कि किस प्रकार सही मार्गदर्शन और सरकारी सहायता से ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकती हैं। पूजा कंडारी पहले एक सामान्य गृहिणी थीं, जिनके पास आय का कोई स्थायी साधन नहीं था।
साल 2023 में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में शुरू की गई ‘गोट वैली योजना’ ने उन्हें नया अवसर दिया। इस योजना के तहत पूजा कंडारी को एक लाख रुपये का ब्याज-मुक्त ऋण और 39 हजार रुपये की सब्सिडी मिली। इसके साथ ही उन्हें पांच बकरियां और एक बकरा दिया गया। इस ऋण और सरकारी मदद से उन्होंने पशुपालन शुरू किया और अब उनकी बकरियों की संख्या 30 से 40 तक पहुंच चुकी है।
पशुपालन विभाग द्वारा उन्हें नियमित टीकाकरण, दवाइयां और तकनीकी प्रशिक्षण दिया गया, जिसका परिणाम आज उन्हें सालाना एक से 1.5 लाख रुपये की आय मिल रही है। यह उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में सहायक साबित हुआ है और वह अब पूर्ण रूप से आत्मनिर्भर हो चुकी हैं।
पंतवाड़ी पशु चिकित्सालय की पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. अनमोल नौटियाल ने इस सफलता को प्रमाणित किया है और बताया कि पशुपालन केवल पशु पालने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक स्थायी आय का सशक्त माध्यम भी बन सकता है।
पूजा कंडारी अब अपने गांव की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी हैं। उनका अनुभव यह दर्शाता है कि जब योजनाएं सही लाभार्थियों तक पहुंचती हैं और निरंतर तकनीकी सहयोग मिलता है, तो ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार की मजबूत नींव रखी जा सकती है।











