भोपाल, 01 मई।
प्रदेश में बागवानी और उद्यानिकी फसलों को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा योजना खाका तैयार किया है, जिसके तहत फल, फूल और सब्जियों की खेती को नई दिशा देने पर जोर दिया जा रहा है।
प्रदेश में फूलों और सब्जियों के उत्पादन में उल्लेखनीय स्थिति दर्ज की गई है, जहां राज्य देश में तीसरे स्थान पर है, वहीं फलों के उत्पादन में चौथे स्थान पर है। इसी आधार पर किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री ने किसानों को सीजनल और उद्यानिकी फसलों की ओर प्रेरित करने की बात कही है, जिनकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अच्छी मांग है।
उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग की समीक्षा के दौरान यह भी बताया गया कि औषधीय फसलों और उनके उत्पादों का उपयोग देशी एवं आयुर्वेदिक दवाइयों की आपूर्ति में बढ़ाया जाएगा। साथ ही मसाला फसलों के उत्पादन में प्रदेश देश में पहले स्थान पर बना हुआ है।
इसी क्रम में वर्षभर विभिन्न स्थानों पर फल और सब्जियों से जुड़े महोत्सव आयोजित किए जाएंगे, जिनमें जून में भोपाल में आम महोत्सव, जुलाई में खरगोन में मिर्ची महोत्सव, सितंबर में बुरहानपुर में केला महोत्सव, अक्टूबर में इंदौर में सब्जी महोत्सव और नवंबर में ग्वालियर में अमरूद महोत्सव शामिल हैं।
सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए उज्जैन में पुष्प उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। इसके तहत सेंटर फॉर एक्सीलेंस फ्लोरीकल्चर की स्थापना की जा रही है, जिसके लिए शहर के निकट 19 एकड़ भूमि चिन्हित की जा चुकी है और केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है।
आंकड़ों के अनुसार देश में मसाला फसलों का उत्पादन 129.52 लाख मीट्रिक टन है, जिसमें प्रदेश का योगदान 57.72 लाख मीट्रिक टन है, जिससे यह पहले स्थान पर है। फूल उत्पादन में प्रदेश तीसरे स्थान पर और सब्जी उत्पादन में भी तीसरे स्थान पर है, जबकि फलों के उत्पादन में चौथा स्थान प्राप्त है।
प्रदेश में मखाना की खेती को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिसके तहत 14 जिलों में इसका विस्तार किया जाएगा। इनमें नर्मदापुरम, सिवनी, बालाघाट, छिंदवाड़ा, जबलपुर, कटनी, मंडला, डिंडोरी, रीवा, शहडोल, रायसेन, अनूपपुर, पन्ना और सतना शामिल हैं। इस वर्ष मखाना उत्पादन का रकबा बढ़ाकर 85 हेक्टेयर करने का लक्ष्य रखा गया है और इसके लिए केंद्र सरकार की ओर से 40 प्रतिशत तक अनुदान सहायता भी दी जाती है।









