बेंगलुरु, 22 मई।
राष्ट्र सेविका समिति की वरिष्ठ स्तंभ और पूर्व अखिल भारतीय सहकार्यवाहिका रुक्मिणी अक्का का 98 वर्ष की आयु में देहावसान हो गया। पिछले कुछ समय से उम्र से संबंधित बीमारियों से जूझ रहीं रुक्मिणी अक्का ने गुरुवार रात बेंगलुरु स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। उनके निधन से पूरे संगठन और समाज में शोक की लहर दौड़ गई है।
अक्का के पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए आज दोपहर एक बजे तक उनके निवास स्थान पर रखा गया है, जिसके उपरांत हरिश्चंद्र घाट स्थित रुद्रभूमि में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। उनके जाने को एक युग का अंत माना जा रहा है, जिन्होंने अपना पूरा जीवन निस्वार्थ भाव से राष्ट्र और समाज की सेवा में समर्पित कर दिया था।
केंद्रीय मंत्री शोभा करंदलाजे ने उनके निधन पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि रुक्मिणी अक्का ने समिति के शुरुआती नेतृत्व से लेकर वर्तमान तक हर दौर में एक मार्गदर्शक के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि अक्का ने भारतीय संस्कृति, हिंदुत्व और महिला सशक्तिकरण को नई ऊंचाई दी। उनके द्वारा किए गए कार्य, विशेषकर महिलाओं के सर्वांगीण विकास के प्रति उनका समर्पण, आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव एक मशाल की तरह प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।






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